टीम एबीएन, झुमरी तिलैया। श्री कोडरमा गौशाला समिति ने गौवंशों के संवर्धन के लिए पितृपक्ष के अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा के मूल पाठ का श्रवण गौवांशों को करा रहा है। वृंदावन से आये कथावाचक आचार्य अनिरुद्ध शर्मा एवं आचार्य भरत शर्मा श्रीमद् भागवत कथा का मूल पाठ कर रहे हैं।
आचार्य ने बताया कि साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कुल 365 अध्याय का पाठ किया जायेगा। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा में द्वादश स्कंध है। प्रत्येक दिन तीन स्कंध का पाठ किया जायेगा। जिसके तहत प्रत्येक दिन 45 से 50 अध्याय पूरे किये जा रहे हैं। जिसमें कथा के दूसरे दिन आचार्य ने श्रीमद् भागवत कथा के 45 अध्याय को पूरा किया।
दूसरे दिन की कथा में आचार्य ने बताया कि परीक्षित जी महाराज को श्राप मिला था कि अगले एक सप्ताह में उनकी मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से हो जायेगी। इसके बाद परीक्षित जी महाराज चिंतित मुद्रा में गंगा के किनारे बैठे थे, तभी संतों की टोली ने उनसे चिंता का कारण पूछी।
इस दौरान परीक्षित जी महाराज ने 7 दिनों में अपने आत्म कल्याण के उपाय की जानकारी संतों से मांगी। इसके बाद वेद व्यास जी के पुत्र सुखदेव जी का आगमन हुआ। इस दौरान सुखदेव जी महाराज ने संतों के बीच परीक्षित जी महाराज को आत्म कल्याण के लिए 7 दिनों के भीतर संपूर्ण श्रीमद् भागवत पुराण का ज्ञान प्रदान किया। जिससे उनका आत्म कल्याण हुआ और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
आचार्य ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान पितरों के तर्पण एवं गौवंशों की समृद्धि और संरक्षण के लिए 7 दिनों में श्रीमद् भागवत कथा के संपूर्ण अध्याय को पूरा किया जायेगा। उन्होंने बताया प्रत्येक दिन सुबह 7 से 11 बजे तक और शाम में 3 बजे से 5 बजे तक गौशाला परिसर में श्रीमद् भागवत कथा के पाठ में पहुंचकर लोग पुण्य के भागी बन सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ जय सियाराम सत्संग समिति ने गौशाला परिसर में सुंदरकांड पाठ किया। मौके पर श्री कोडरमा गौशाला समिति के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।