एबीएन सोशल डेस्क। आये दिन घटना-दुर्घटनाओं की खबर आती रहती हैं। यानी हर दिन कहीं न कहीं से शोक सन्देश आते रहते हैं। जिससे हर परिवार का मन दुखी रहता है। लेकिन इस बार मां भगवती के प्रस्थान का फलाफल भी शोक का है।
ऐसे में शोक संदेशों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता है। सप्तमी के अनुसार घोड़ा पर आयेंगी दुर्गा जी और भैंसा पर जायेगी। प्रतिपदा के अनुसार नाव पर आएंगी देवी जो शुभ है। पर शास्त्रीय मत सप्तमी को ही माना जाता है।
15 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक नवरात्रि, नौ दिनों का होगा
- कलश स्थापन -15 अक्टूबर रविवार
- महासप्तमी - 21 अक्टूबर शनिवार
- महाअष्टमी - 22 अक्टूबर रविवार
- महानवमी - 23 अक्टूबर सोमवार
- विजयादशमी - 24 अक्टूबर मंगलवार
यह नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी। 15 अक्टूबर को प्रतिपदा पूरे दिन है। परन्तु वैधृति योग दोपहर 11:56 तक है और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:36 से 12:56 तक है।
पंडित रामदेव पाण्डेय के अनुसार 20 अक्टूबर शुक्रवार को षष्ठी होगा इस दिन बेलभरण पूजा होगा, इस दिन सूर्यास्त शाम 5:41 बजे है। महासप्तमी 21 अक्टूबर शनिवार को है।
इस दिन भगवती देवी का आगमन कैलाश पर्वत से पूजा पंडालों में होगा, जो नवपत्रिका प्रवेश कहलाता है। भगवती घोड़ा पर आ रही हैं, जिसका फल अशुभ होता है। विजयादशमी 24 अक्टूबर मंगलवार को है।
भगवती का प्रस्थान भैंसा पर होगा, जो शोक का कारक है। महाष्टमी का उपवास 22 अक्टूबर रविवार को होगा, इसलिए सन्धि पूजा शाम 5:25 पर हर पूजा पंडालों में होगा। 24 अक्टूबर मंगलवार को नवरात्र का पारण होगा।