टीम एबीएन, कोडरमा। अध्यात्म योगी परम पूज्य मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज का धर्म नगरी झुमरी तिलैया में भव्य चातुर्मास चल रहा है। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मुनि श्री के मुखारविंद से प्रतिदिन प्रवचन की बहार हो रही है।
जैन मंदिर के भगवान पारसनाथ की वरदानी छांव तले विश्व हितांकर विघ्नहरण चिंतामणि पारसनाथ की अभिषेक क्रिया के बाद भक्त समुदाय ने आज मंदिर और भगवान का मंजन (साफ सफाई) किया गया। ये भादो मास में जैन धर्म का सबसे बड़ा पर्व आता है।
इसके पश्चात जैन संत मुनि श्री 108 सुयश सागर जी ने कहा कि संत तो सदा ही आशीर्वाद देते हैं। संत तो स्वयं आशीर्वाद स्वरूप हैं। संत के चरणों में जो भी श्रद्धा और भक्ति से जाता है, उसे उनका आशीर्वाद जरूर मिलता है।
एक बात ध्यान रखना- आशीर्वाद अपने आप मिलता है। तुम कभी किसी संत से आशीर्वाद मांगना मत, बस नमन और प्रणाम करते जाना। तुम्हारा नमन जिस दिन हृदय से होगा, उस दिन संत का आशीर्वाद भी तुम पर बरस जायेगा। आशीर्वाद तो वही है जो हृदय से फूटे, लेकिन इसके लिए नमन भी तो नाभी से फूटना चाहिए।
मुनि सुयश सागर जी ने कहा कि मैं एक सज्जन को जानता हूं जो अक्सर मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि मुझे आशीर्वाद दो। यदि मैं उनके सिर पर हाथ नहीं रखता हूं, तो वे मेरा हाथ पकड़ कर जबरदस्ती अपने सिर पर रखवा लेते हैं। यह तो कोई आशीर्वाद नहीं हुआ। आशीर्वाद तो वही है, जो सहज संत के हृदय से झरने की तरह फूटे और चारों ओर से तुम पर बरस जाये।
सहज हाथ सिर पर रख जाये, तो आशीर्वाद है। तो मैं कहता हूं कि तुम केवल श्रद्धा से नमन करना और नमन करते जाना एक दिन ऐसा जरूर आयेगा जब तुम्हें संत के हृदय से फूटा आशीर्वाद मिल जायेगा और जिस दिन वह आशीर्वाद की कृपा दृष्टि तुम्हें मिल जायेगी, समझना तुम्हारा कल्याण हो गया।
तुम्हें सब कुछ मिल जाये, ये घटना अचानक होगी और जब भी घटेगी तब न तो इसकी भनक संत को पड़ेगी और न ही भक्तों को। न तो संत को मालूम होगा कि मैंने भक्तों को आशीर्वाद दे दिया है और न ही भक्तों को पता होगा कि उसे आशीर्वाद मिल चुका है।
बड़ी रहस्यपूर्ण घटना है जो हमेशा दो हृदयों के बीच घटती है। फिर भी दोनों हृदय अंजान बने रहते हैं। संध्या में प्रतिदिन णमोकार चालीसा का पाठ हो रहा है। उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा और नवीन जैन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।