सनातन ग्रंथों ने कहा भगवान से भय नहीं करो
हर घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग रहना चाहिए
टीम एबीएन, रांची। डरना है तो अपने बुरे कर्मों से डरना चाहिए। यही कर्म है जो स्वर्ग और नरक देता है। सनातन ग्रंथों में कर्म की महत्ता है। जबकि पश्चिम के पथों में कथित भगवान की प्रधानता है। उनसे डरो; क्योंकि वह हिकमत वाला है। ऐसा कहकर पथों ने स्वयं के भगवान को स्वार्थी और डरावना बना दिया है।
सनातन में तो भक्त भगवान को श्राप देता है। ब्राह्मण भृगु ने शिव को श्राप दिया- अब आपके लिंग की पूजा होगी। शिव लिंग धरती और ब्रह्मांड का संयुक्त प्रतीक है। नारद ने विष्णु को श्राप दिया- आप भी नारी के लिए पृथ्वी पर अवतार लें। वही राम हुए। भगवान भक्त के लिए अवतरित होते हैं।
राम ओम नम: शिवाय... जपते हैं तो शिव राम राम जपते हैं। शिव पुराण वायवीय संहिता अध्याय ग्यारह श्लोक छप्पन कहता है इस छह अक्षर के मंत्र से आदमी को सब सिद्धियां मिलती हैं। हर घर में नर्मदेश्वर शिव लिंग को रखना चाहिए। नर्मदा नदी शिव की मानस पुत्री है। शिव का आशीर्वाद नर्मदा को दिया कि आपके कंकड़-कंकड़ में शंकर नर्मदेश्वर के रूप में होंगे। इनको घर में रखकर पूजा करनी चाहिए।
जिस घर में नर्मदेश्वर शिव लिंग होता है, उस घर में न अकाल मृत्यु होती है, न दरिद्रता आती है। कुबेर और यम शिव पार्षद हैं। नर्मदेश्वर की प्रतिष्ठा जरूरी नहीं है और इसपर चढ़ा प्रसाद सभी पा सकते हैं। इनकी पूजा छूट जाये या घर से कहीं चले जायें, तो शिव लिंग को कटोरे भर पानी में डालकर रख दें तो भी शिव प्रसन्न रहते हैं।