- शिव साम्यवादी, समाजवादी और साम्राज्यवादी भी है
टीम एबीएन, रांची। राम जानकी मंदिर हाउसिंग कालानी बरियातू में पूर्व की तरह आज से बारह अगस्त तक सन्ध्या काल में श्री शिवपुराण कथा हो रही है। कथावाचक पं रामदेव पाण्डेय ने आज के कथा में कहा कि शिव वेद काल से पहले का अजन्मा है। साकार भी है तो निराकार भी है।
यह न देवता हैं न मनुष्य, न राक्षस, न गन्धर्व, न अण्डज, न स्वेदज, न पिण्डज, न जरायुज, शिव सबों का पिता है। शिव निराकार भी है, शिव साम्यवादी भी है, राखी भी है, वैरागी भी है, नचैया भी है। इन्हें आप भगवान कह कर पूजा कर लो या शैतान कह कर भी पत्थर मार लो। आपके शरीर में दाहिने हाथ का अंगुठा शिव का प्रतिनिधित्व करता है।
शिव भक्त किसी भी वर्ण का हो नर हो या नारी सधवा हो या विधवा रूद्राक्ष और भष्म का त्रिपुण्ड लगाने से अकाल मृत्यु नहीं होती है। हर शिव भक्त को भष्म और रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष का आकार बेर या आंवला के बीज के आकार से कम आकार का रूद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए।