- फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से सम्मानजनक आजीविका के साधनों से जुड़ रहीं महिलाएं
- आजीविका के वैकल्पिक साधनों से आमदनी कर खुशहाल जीवन जीने की ओर अग्रसर महिलाएं
- फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़कर पलामू प्रमंडल में 1700 से अधिक महिलाओं ने अपनाया आजीविका का वैकल्पिक साधन
- चिह्नित महिलाओं को आजीविका संवर्द्धन के लिए मिल रहा ब्याज मुक्त ऋण
टीम एबीएन, पलामू/ रांची। राज्य की महिलाओं को सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसके लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही है, जिसका सीधा लाभ लक्षित समूह को मिल रहा है। ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए आजीविका संवर्द्धन हुनर अभियान, फूलो झानो आशीर्वाद अभियान के साथ-साथ महिलाओं को सखी मंडलों से जोड़कर सरकार द्वारा आजीविका के नए स्रोत उत्पन्न करने में मदद की जा रही है।
सरकार की फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से महिलाएं सम्मानजनक जीवन जीने लगी हैं। पलामू प्रमंडल में हड़िया-दारू के निर्माण एवं बिक्री से मजबूरन जुड़ी करीब 1770 महिलाओं ने फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़कर आजीविका के वैकल्पिक साधनों को अपनाया है। पलामू जिले में 424 महिलाओं ने आजीविका के वैकल्पिक साधन को अपनाया है।
वहीं लातेहार जिले में 965 एवं गढ़वा जिले में 381 महिलाएं फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़ी हैं। इससे न केवल महिलाओं की इज्जत बढ़ी है, बल्कि उनके परिवारजनों का भी मान-सम्मान बढ़ा है। इस धंधे को छोड़ चुकी महिलाएं पलामू प्रमंडल के तीनों जिले यथा पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के विभिन्न गांव-पंचायत एवं प्रखंडों के हैं। फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से महिलाओं की दिशा एवं दशा दोनों बदल रही है।
इस कारोबार को छोड़ चुकी महिलाएं अब इसे समाज की कुरीतियां भी समझने लगी हैं। महिलाओं ने बताया कि हड़िया-दारू के निर्माण एवं बिक्री से उन्हें भी परेशानी होती थी और परिवार के अन्य सदस्य भी प्रभावित होते थे। खासकर बच्चों पर इसका प्रतिकूल असर दिखता था। स्नेहीबंधुगणों जब घर आते, तो लज्जित भी होना पड़ता था।
आर्थिक कमियों के कारण मजबूरन ऐसे कारोबार से जुड़े थे, लेकिन इसे छोड़ने एवं आजीविका के वैकल्पिक साधन अपनाने से अब गांव-समाज में आत्मसम्मान बढ़ा है। घर-परिवार के सदस्य भी सुरक्षित महसूस करने लगे हैं। महिलाएं सखी मंडल से जुड़कर आजीविका के विभिन्न साधनों को अपनाया है और आर्थिक आमदनी कर रहे हैं।
आजीविका के नए स्रोत उत्पन्न करने में सरकार से मदद भी मिल रही है। फूलो झानो आशीर्वाद अभियान के तहत महिलाओं को सखी मंडलों से जोड़कर चिन्हित महिलाओं को आजीविका संवर्द्धन के लिए 10 हजार का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। इस अभियान से जुड़कर महिलाओं ने रोजगार के विभिन्न साधनों को अपनाया है।
कोई ऋंगार दुकान, चाय-पकौड़ी, समौसा दुकान, अंड़ा-आमलेट दुकान का संचालन कर रही हैं, तो कई महिलाएं पशुपालन, बकरी पालन, मुर्गी एवं बत्तख पालन, तथा कृषि कार्य से जुड़कर अपनी आजीविका चलाने में जुटी हैं। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के डीपीएम विमलेश शुक्ला ने बताया कि फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से महिलाएं समाज में बेहतर कर रही हैं। इसे और गति देने का कार्य हो रहा है।
एक ही गांव की 20 महिलाओं ने छोड़ा हड़िया-दारू का निर्माण एवं बिक्री कार्य
पलामू के मेदिनीनगर सदर प्रखंड के झाबर पंचायत के पीढ़िया गांव में 400 से अधिक घर हैं। आबादी भी अच्छी-खासी। बताया गया कि अधिसंख्य परिवार उरांव समाज के हैं। एक समय यहां बहुतायत मात्रा में हड़िया-दारू मिल जाता था। इसका सेवन कर लोग दिन में भी लुढ़कते-चलते थे। व्यंग्य व हंसी-मजाक भी वैसे ही चलती थी, कि महिलाओं को सिर उठाकर चलने में परेशानी होती थी।
यहां की महिलाओं ने इस स्थिति को बदलने को ठाना और अब स्थिति बदलने भी लगी है। महिलाओं ने जब आजीविका के दूसरे साधनों का अपनाया तो इसका असर उनके परिवार व समाज पर भी पड़ने लगा है। करीब 20 महिलाओं ने हड़िया-दारू के निर्माण एवं बिक्री कार्य को पूर्णत: छोड़कर आजीविका के दूसरे साधनों को अपनाया है। इससे उनके सामाजिक और आर्थिक दशा बदली है।
कल तक किसी तरह परिवार का गुजारा करने वाली महिलाएं आज अपने हाथों के दम परिवारजनों का बेहतर परवरिश कर पा रही हैं। इस गांव में साप्ताहिक बाजार लगता है। स्थानीय होने के वास्ते महिलाएं बाजार के इर्द-गिर्द अपनी दुकानें सजाती हैं। इससे आमदनी कर महिलाएं खुशहाल जीवन जीने ओर में अग्रसर हैं।
इन महिलाओं को सम्मानजनक जीवन के लिए प्रेरित कर रहे जेएसएलपीएस के सामुदायिक समन्वयक प्रभात रंजन पांडेय ने बताया कि एक ही गांव में 20 से अधिक महिलाओं द्वारा शराब निर्माण एवं बिक्री कार्य को छोड़ना बड़ी बात है।
गांव की आरती देवी, पार्वती देवी, मंजू देवी, जसमतिया देवी, रेवण्ती देवी, सुगंती देवी, सोनी देवी, सकुंता देवी, ललिता देवी, रीता देवी, लखपति देवी, झिलो देवी, विगनी देवी आदि महिलाओं ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से आत्मनिर्भर हुई हैं। अन्य महिलाओं को भी अभियान से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें महिलाएं: आयुक्त
आयुक्त मनोज जायसवाल ने कहा कि सड़कों पर महिलाएं हड़िया-दारू बेचती नहीं दिखें, इसके लिए प्रशासनिक प्रयास किए जा रहे हैं। हड़िया-दारू निर्माण एवं बिक्री करने वाली महिलाओं को फूलो झानो आशीर्वाद अभियान के तहत आजीविका से जोड़कर हर संभव मदद कर उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम हो रहा है। इस कार्य से जुड़ी अन्य महिलाओं से अपील है कि वे फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें। आर्थिक रूप से सशक्त हों और बेहतर समाज निर्माण में भागीदार बनें। कुरीतियों से निकलकर मन में सम्मानजनक जीवन जीने की चाहत विकसित करें।
लाभुक : 1
सोनी देवी पलामू के पीढ़िया गांव में ही शृंगार दुकान चलाती हैं। दुकान के सामने के खाली स्थानों में अंडा-आमलेट की दुकान की हैं। इन दुकानों से प्रतिदिन 1000-1200 आमदनी होती है। फायदा 250 से 300 रुपये। आमदनी से बच्चों को पढ़ाती हैं और परिवार चलाती हैं। उन्होंने बताया कि वे मां शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से उन्हें 10 हजार रुपए की ब्याज मुक्त ऋण मिला। इस राशि से दुकान का सामान खरीदी और बेहतर आमदनी कर सम्मानजनक जीवन चला रही हैं। इस कार्य को आमजन सराहना भी करते हैं और घर-द्वार में भी शांति रहती है।
लाभुक : 2
सकुंता देवी गरीबी और आर्थिक तंगहाली से जूझ रही थीं। पूर्व में अपनाये रोजगार के साधनों के संबंध में कहने में भी हिचक होती है। गोदावरी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर रोजगार के वैकल्कि साधनों को अपनाने का प्रयास किया। सरकार से 10 हजार रुपये का ऋण प्राप्त होने के बाद बकरी पालन का कार्य शुरू किया। तीन बकरियों से 8 बकरी हो गयी। इसमें तीन बकरियों को 10 हजार रुपये में बेच भी दिया। वर्तमान में पांच स्वस्थ बकरियां हैं, जिससे 20 से 30 हजार आमदनी होने की उम्मीद है।
लाभुक : 3
पार्वती देवी पूर्व में हड़िया-दारू बेचकर जीवन-बसर करती थीं। यमुना मिलन स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। सरकार द्वारा फूलो झानो आशीर्वाद अभियान की शुरूआत होने से उन्हें 10 हजार रुपये का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया गया। इस राशि से मुर्गा-मीट की दुकान चलाती हैं। साथ में एक छोटा किराना दुकान भी है। दुकान से प्राप्त राशि से घर-परिवार की परवरिश में मदद मिल रही है। साथ ही इस व्यवसाय से आत्मसम्मान भी मिला है।
लाभुक : 4
मंजू देवी ज्योति समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर हुई हैं। पूर्व में मंजू हड़िया-दारू निर्माण एवं उसके बिक्री से आमदनी करती थी, लेकिन झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के अधिकारीगणों एवं समूह की दीदियों से प्रेरित होकर हड़िया-दारू के व्यवसाय को बंद कर दिया। 10 हजार रुपए ऋण मिला। उसके एवज में ब्याज भी नहीं लगा। उस राशि से सब्जी खरीदकर बेचत हैं, जिससे अच्छा मुनाफा होता है। समाज के लोग भी इस कार्य की सराहना करते हैं।