परोमा भट्टाचार्य
भीषण आग लगी है घर में
कौन किसे बचायेगा
क्या यह हमें विकसित भारत बतायेगा
या नया भारत इसमें प्रकाश डालेगा
बेबशी और आक्रोश के द्वंद में
कब तक समाज बंटेगा
देश की बेटियों को आखिर
कब तक इम्तिहान देना पड़ेगा
किस मिट्टी के बने हैं हम
किस खून को बचाने चले हैं हम
हत्या हो गयी हमारे अपने अस्तित्व की,
क्या अब भी राजनीति करेंगे हम
भीषण आग लगी है घर में
कौन किसे बचायेगा