विश्व संगीत दिवस पर विशेष
टीम एबीएन, पलामू/ रांची। पलामू के जाने-माने शास्त्रीय संगीतज्ञ सौरव दुबे ने संगीत को खास पहचान दी है। आज विश्व संगीत दिवस के समय हम चर्चा सौरव दुबे जी की करेंगे, जो खुद भी संगीत को साध रहे हैं और पलामू व झारखंड के कई जिलों के बच्चों तक संगीत सिखा रहे हैं व पहुंचा रहे हैं।
पलामू में संगीत का रिश्ता काफी पुराना रहा है। कई कलाकार संगीत की शिक्षा अपने स्तर से दे रहे हैं। इन सब में सौरव दुबे एकमात्र ऐसे शास्त्रीय गायक व शिक्षक हैं, जिनकी शिक्षा लोकप्रिय एवं सराहनीय है।
सौरव पलामू व झारखंड के अन्य जिलों में शास्त्रीय व सुगम संगीत को सिखा रहे हैं। वह उनको बढ़ा रहे हैं। रागों व तलों का व्याकरण, सूर का लगाव, तानपुरे के साथ गायकी व लय का समझ पर विशेष जानकारी देना एक उत्कृष्ट शिक्षक की पहचान है।
नाद ब्रह्म संगीत कला केंद्र के अंतर्गत कई विद्यार्थी आज संगीत की शिक्षा पलामू में व अन्य राज्यों में भी ले रहे हैं। सौरव का कहना है कि शुद्ध शास्त्रीय संगीत का प्रचार व प्रसार होना बड़ा आवश्यक है।