एबीएन सोशल डेस्क। बिहार स्कूल ऑफ योगा मुंगेर द्वारा आयोजित योग शिविर का आज रांची में समापन हुआ। स्वामी गोरखनाथ सरस्वती शिविर के षष्ठ दिवस पर आज लोगों को बहुत बड़ा यौगिक साधना बतला गये जिसको करके मनुष्य डॉयबिटीज से मुक्त हो सकता है और अपनी पाचन प्रणाली की पूरी सफाई मात्र बीस से पच्चीस मिनट में कर सकता है।
योग के तो बहुत आयाम हैं उसमें हठयोग व्यक्ति के आंतरिक शरीर की सफाई करता है और यह तनाव को भी शक्तिशाली तरीके से खत्म कर देता है। हठयोग की विधियों में एक क्रिया है शंखप्रक्षालन जो धौति क्रिया में आता है। यह है शरीर को भीतर से धोने की क्रिया (सम्पूर्ण पाचन प्रणाली का क्लींजिंग) जिसमें मुंह से लेकर पूरा ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत और मलाशय की सफाई की जाती है। यह क्रिया डाईबिटीज में बहुत कारगर है।
मधुमेह प्रबंधन में 40 दिन तक प्रतिदिन शंखप्रक्षालन का लघु रूप, कुंजल, नेति, शरीर के हिसाब से सूर्यनमस्कार या कुछ आसनों का समूह, शशांकासन, नाड़ीशोधन, कपालभाति तथा भ्रामरी और प्रतिदिन योगनिद्रा का अभ्यास बहुत ज्यादा प्रभावकारी है। डाइबिटीज बालों पर देखा गया है कि चालीस दिन के लगातार अभ्यास से इस रोग को खत्म किया जा सकता है।
स्वामी गोरखनाथ जी ने कहा यह देन है हमारे गुरु परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती का। परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती का आविष्कार है योगनिद्रा जो आज दुनिया की सबसे प्रचलित ध्यान की विधि है।
अरविन्दो आश्रम के सचिव श्री रमेश भाई स्वामी जी के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती की महती कृपा है जो उन्होंने स्वामी गोरखनाथ सरस्वती जैसे सिद्ध आचार्य को हमारे आश्रम में भेजकर छह दिनों तक योग विद्या का संचालन कराने का सुअवसर दिये।
रांची नगर के हजारों लोगों को इससे शारिरिक लाभ प्राप्त हुआ है और मन की पीड़ा खत्म हुई है। मात्र छः दिन के योग से लोग बहुत खुश नजर आ रहे हैं। स्वयं में बहुत गहरा अनुभव लोगों को हुआ है। यह हमारे लिये, रांची नगर वासियों के लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद मिला है इसे जीवन में उतारने की जरूरत है।
उन्होंने अहर्निश इस योगोत्सव कार्यक्रम में सहयोग देने और हर तरह से सफल बनाने में यहां के प्रख्यात योगाचार्य संन्यासी मुक्तरथ जी एवं इनके सहयोगी बने रहे आदित्य कुमार और रूपम कुमारी का भी तहेदिल से आभार व्यक्त किया और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त किये।