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भागवत पुराण में रसभाव की भक्ति का निरुपण है : किशोरी

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भागवत पुराण में रसभाव की भक्ति का निरुपण है : किशोरी
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  • वैष्णवी लोहरदगा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ संपन्न
  • कथा के आखिरी दिन श्रीकृष्ण के 16108 विवाह के रहस्य से भक्त हुए अवगत
  • आखरी दिन सुदामा चरित्र, श्रीकृष्ण- उद्धव संवाद, प्रभु के स्वधाम गमन और राजा परीक्षित की मोक्ष की कथा सुनायी गयी

टीम एबीएन, लोहरदगा। मौसम की प्रतिकूलता के बीच शुक्रवार को राणा चौक स्थित स्थित अग्रसेन भवन परिसर में लोहरदगा में अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के तत्वावधान में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा की पूर्णाहुति भव्यता के साथ महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ हो गया।

श्रीकृष्ण धाम वृंदावन की कथा वाचिका किशोरी वैष्णवी ने कथा के आखरी दिन शुक्रवार को भगवान श्री कृष्ण के 16108 विवाह की कथा, सुदामा चरित्र, पौंड्रक उद्धार, श्री कृष्ण- उद्धव संवाद, प्रभु के स्वधाम गमन, परीक्षित मोक्ष और भागवत सार के बारे में भक्तों को विस्तार से बताया। संगीतमय कथा वाचन का रसपान कराया। भक्ति की अथाह सागर में भागवत प्रेमियों ने डुबकियां लगायी।

किशोरी वैष्णवी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर और रोचक लीलाओं में से एक लीला है, भगवान श्री कृष्ण की 16108 रानियां आखिर क्यों किया था विवाह, इसके पीछे भगवान की क्या लीला थी, कि श्रीकृष्ण भगवान ने जब स्वयं को राधा को समर्पित कर दिया था, तो फिर भी राधा के होते हुए भी क्यों उन्हें इन रानियों से करना पड़ा विवहा, तो आज हम आपको इसी आश्चर्यचकित रहस्य के सत्य को बताया।

कथा वाचिका किशोरी वैष्णवी ने कहा कि सत्य है कि नरकासुर नामक राक्षस जिसको पृथ्वी का पुत्र होने के कारण भोमासुर भी कहा जाता था,ने 16108 रानियों को बंदी बनाया हुआ था। उक्त कन्याएं द्वापर युग के राजाओं की पुत्रियां थी। बंदी बनी इन कन्याओं ने भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना की थी हे भगवान हमारी रक्षा करें। तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर इन सभी कन्याओं को उसके बंदी ग्रह से मुक्त करवाया था।

किशोरी वैष्णवी ने इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के मित्र सुदामा के चरित्र के बारे में कहा कि निर्धन ब्राह्मण सुदामा की अद्भुत कथा है। सुदामा महान कृष्ण भक्त थे। वह बालपन में कृष्ण का मित्र भी थे। इस ब्राह्मण की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण में भी उल्लेखित है।

कथा वाचिका किशोरी वैष्णवी ने कथा का विस्तार करते हुए राजा परीक्षित की मोक्ष कथा के बारे में बताया कि श्री शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को भगवान श्रीनारायण के मुख्यतः नौ अवतारों के साथ दसवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, बाल लीला में माखन चोरी, राजा कंस द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसों के उद्धार, कंस वध, रास लीला, रुक्मिणी विवाह सहित अनेक लीलाओं को विस्तार से बताया।

उन्होंने कहा श्रीमद्भागवत कथा में भगवान नारायण के 24 अवतारों का वर्णन है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मित्र श्री सुदामा जी के चरित्र का वर्णन किया।।किशोरी वैष्णवी ने राधाजी के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया राधाजी भगवान श्रीकृष्ण से किस प्रकार प्रेम करती थी। साथ ही प्रेम और प्यार में क्या अंतर है। यह भी बताया।

किशोरी वैष्णवी ने अंत में राजा परीक्षित के मोक्ष और भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम सिधारने के प्रसंग का वर्णन किया। महाआरती के पश्चात श्रीमद्भागवत कथा को विराम दिया गया। इसके बाद महाप्रसाद वितरित की गयी।

कथा वाचिका किशोरी वैष्णवी ने श्रीमद्भागवत सार का उल्लेख करते हुए कहा कि भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद्भागवतम् या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य वर्ण्य विषय भक्ति योग है, जिसमें कृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरुपण भी किया गया है। परंपरागत तौर पर इस पुराण के रचयिता वेद व्यास को माना जाता है।

कथा की पूर्णाहुति के समय प्रो परमानंद अग्रवाल, बिसुनदेव अग्रवाल, राजीव रंजन,अनिता अग्रवाल, धीरज अग्रवाल, संजय अग्रवाल, उपेंद्र कुमार कुशवाहा, आद्या देवी, सुरेश अग्रवाल, विकास अग्रवाल, संतोष कुमार, सचिता प्रसाद अग्रवाल, जय गोविन्द सोनी, प्रमोद प्रजापति, अशोक कुमार, आरती अग्रवाल, तान्या अग्रवाल, रूपा अग्रवाल, आशीष गोयल, अमर प्रसाद अग्रवाल, आनंद गोयल, रोबिन अग्रवाल, बैजनाथ अग्रवाल, अमर प्रसाद अग्रवाल सुरेश अग्रवाल, निशांत अग्रवाल बड़ी संख्या में भागवत प्रेमी उपस्थित थे हालांकि मौसम के कारण कथा सात दिन के बजाय आठवें दिन खत्म हुआ।

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