एबीएन सेंट्रल डेस्क। शुक्रवार को आनंद मार्ग जागृति गद्दोपुर (गौसपुर चक् मजाहिद पंचायत) महुआ के आनंद मार्ग के साधकों द्वारा प्रातः 6:07 पर जयघोष, शंख नाद एवम करतल ध्वनि के साथ बहुत ही पवित्र वातावरण में हर्षोल्लास के साथ श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 102 वां जन्मोत्सव मनाया गया।
श्री श्री आनंदमूर्ति जी का आविर्भाव वैशाखी पूर्णिमा के दिन बिहार के जमालपुर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने मानवता के कल्याण एवम त्राण के लिए वर्ष 1955 में आनंद मार्ग प्रचारक संघ की स्थापना "आत्म मोक्षार्थम जगत हिताए च" की भावना से किया था जिससे मानव समाज हर प्रकार के शोषण से मुक्त हो अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि मानव समाज अविभाज्य है और संसार के सभी मनुष्य एक परम पिता की संतान हैं। अतः उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने विश्व बंधुत्व की भावना से प्रत्येक मनुष्य को साधना सेवा एवम त्याग द्वारा महान बनने को कहा। मानवता एवं जीव जगत के कल्याण के लिए उन्होंने योग साधना के साथ नव्य मानवतावाद, प्रउत के आर्थिक एवं सामाजिक सिद्धांत, यौगिक चिकित्सा, प्रभात संगीत, आर यू, आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ऐसे कई समाजकल्याण एवम समाजुपयोगी शाखाएं दी एवं आदर्श समाज की स्थापना को व्यावहारिक रूप देने के लिए तात्विक, आचार्य एवम जीवनदानी सन्यासियों को मानव समाज एवं जीव जगत के कल्याण हेतु तैयार कर सेवा व्रत में लगाया।
आनंद मार्ग के सभी अनुयायी इस महत कार्य में अपना योगदान देकर एक स्वस्थ समाज के निर्माण में तत्पर हैं। जन्म उत्सव का आयोजन साधना कीर्तन एवं प्रीतिभोज के बाद लगभग 500 लोगो के बीच नारायण सेवा एवम प्रसाद वितरण के साथ समाप्त हुआ। कार्यक्रम का आयोजन गद्दोपुर (आनंद मार्ग ईकाई) के लगभग 50 साधकों द्वारा आनंद मार्ग यूनिट गद्दोपुर के उपसचिव श्री रामबचन जी की देखरेख में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बीआईटी मेसरा, रांची से आके हुए प्राध्यापक श्री मृणाल जी ने प्रभात संगीत की प्रस्तुति की। कार्यक्रम के अंत में आनंद वाणी पाठ एवम अध्यात्मिक चर्चा हुई।
आज आंदापूर्णिमा के शुभ अवसर पर वैशाली भुक्ति के साथ साथ विश्व के संपूर्ण आनंदमार्ग इकाईयों (विश्व के160 से अधिक देशों में) में मनाया गया।
इस क्रायक्रम की सफल बनाने में आनंदमार्ग ईकाई गद्दोपुर के श्री अरूण (मुन्ना) जी, श्री अरूण जी, ऋषिकेश जी, प्रज्ञान जी , विजया जी, दिव्या जी ने अपना योगदान किया। यह जानकारी गद्दोपुर यूनिट के एवम आनंदमार्ग के वरिष्ठ साधक श्री रामानंद जी ने दी।