एबीएन सोशल डेस्क। ब्रह्मलीन बाबा ज्योति स्वरूप का आज अंतिम श्रद्धा कर्म आज आर्य समाज रीति से रांची अरगोड़ा स्थित उनके निवास हुआ। बाबा के इच्छा के मुताबिक श्रद्धा कर्म को काफी सादगी भरा एवं उच्च आध्यात्मिकता से भरपूर बनाया गया था जिससे मंत्र जाप हवन पूजन इत्यादि विधियों का प्रयोग किया गया था।
श्राद्ध कर्म में उपस्थित प्रसिद्ध लोगों में से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, प्रांत सह संघचालक अशोक श्रीवास्तव, विश्व हिंदू परिषद के अशोक अग्रवाल, ज्वाइंट सेक्रेट्री वंदना श्रीवास्तव, एंटी करप्शन ब्यूरो के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी संजय सिंह , संत समाज के पूर्व संगठन मंत्री स्वामी दिव्य ज्ञान समेत अनेक अनेक श्रद्धालु एवं स्वजन उपस्थित थे।
बाबा बाबा ज्योति स्वरूप का जन्म 4 जून 1955 को हुआ को पटना में हुआ था। वह बचपन से ही काफी मेधावी व्यक्तित्व थे। उन्होंने रांची सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक की परीक्षा पास की तथा दिल्ली जाकर मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की। 1980 के आसपास उनके जीवन में वैराग्य की भावना आई आचार्य श्रीमाली जी के शिष्य हो गये।
उनका विवाह श्रीमती बीना स्वरूप जी से हुआ तथा दोनों प्राणी गृहस्थ में रहते हुए संत का जीवन व्यतीत करते रहे। एक प्रकार से कहा जाये गृहस्थ में भी रहकर यह दोनों प्राणी ब्रह्मचारी रहे। इनके सान्निध्य का असर उनके दोनों अनुजों पर भी हुआ। इनके मंझले भाई शंकर दत इन्हीं की प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बने।
उनके छोटे भाई राधा कृष्ण दत्त आज बॉलीवुड के एक नामी अभिनेता हैं उन्हें भी बाबा ज्योति स्वरूप ने प्रेरणा दी एवं राधा कृष्ण दत्त आज फिल्म इंडस्ट्रीज में कभी भी भगवान शिव, कभी भगवान ब्रह्मा कभी भगवान विष्णु के रूप में देखे जाते हैं।
रांची में बाबा ज्योति स्वरूप ने कई महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य किए गौशाला से लेकर पिठौरिया में महर्षि निखिलेश विद्यालय की स्थापना की उनके भाई शंकर दत्त के मुताबिक पूरे पिठौरिया क्षेत्र में इनके द्वारा निशुल्क शिक्षा दी जाती थी अर्थात फीस के लिए कभी किसी बच्चे पढ़ाई नहीं रुकी।
बाबा ज्योति स्वरूप हमेशा प्रचार प्रसार से दूर रहे। झारखंड साधु संत समाज का इन्हें रामरेखा बाबा के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाया गया था।