- देश का वो स्कूल जहां रविवार को होती है पढ़ाई, 101 सालों से यही नियम
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के इस इलाके में एक ऐसा हाई स्कूल है जो रविवार को खुला रहता है पर यहां सोमवार को छुट्टी होती है। यह नियम इस स्कूल में पिछले 101 वर्ष से लागू है। दूसरे स्कूल सोमवार से शनिवार तक, सप्ताह में छह दिन खुले रहते हैं और रविवार को इन स्कूलों में छुट्टी होती है। लेकिन पूर्वी बर्धमान का यह स्कूल अपवाद है।
जमालपुर ब्लॉक में स्थित पूर्वी बर्धमान के इस स्कूल का नाम है गोपालपुर मुक्तकेशी विद्यालय। रविवार को स्कूल के खुले होने का नियम देश के आज़ाद होने से पहले से यहां लागू है और जैसा कि स्पष्ट है, इसके पीछे एक इतिहास है। इस बारे में स्कूल के हेडमास्टर देबब्रत मुखर्जी ने कहा कि इस नियम का इतिहास काफ़ी पुराना है। इस स्कूल की स्थापना से देश की आज़ादी का एक अध्याय जुड़ा है। गांधी जी के नेतृत्व में देश भर में असहयोग आंदोलन चलाया गया था जिसका मुख्य नारा था विदेशी वस्तुओं, विदेशी शैक्षिक संस्थानों, विदेशी भाषाओं का बहिष्कार और देशी वस्तुओं, देशी शिक्षा आदि को अपनाने पर जोर दिया गया था। इस समय इस गांव के जो प्रसिद्ध व्यक्ति गांधी जी के असहयोग आंदोलन का यहां नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने स्वदेशी विचारधारा से प्रेरित होकर इस स्कूल की स्थापना की थी। चूंकि अंग्रेजों ने रविवार को स्कूल की छुट्टी का नियम निर्धारित किया था, तो स्वदेशी की विचारधारा को अपनाते हुए इस दिन इस स्कूल को खुला रखने का नियम बनाया गया और इसके बदले सोमवार को स्कूल में छुट्टी होना निर्धारित किया गया। तभी से इस स्कूल में यह नियम चलता आ रहा है।
इस स्कूल की स्थापना भूषण चंद्र हलदर और अविनाश चंद्र हलदर ने की। स्कूल की स्थापना करने का निर्णय पूरी तरह अविनाश चंद्र हलदर का था और भूषण चंद्र हलदर ने उनको दिशा-निर्देश दिया। इस स्कूल की स्थापना में राजबल्लभ कुमार और विजयकृष्ण कुमार ने वित्तीय मदद दी। इन्हीं लोगों की पहल पर इस स्कूल की स्थापना 5 जनवरी 1922 को हुई। इस समय इस स्कूल में 972 छात्र हैं।
कक्षा 10 में पढ़ाई करने वाले इस स्कूल के छात्र आतिफ मलिक का कहना है कि मुझे रविवार को स्कूल आना अच्छा लगता है। हमारे दोस्त भी स्कूल आते हैं और चूंकि सोमवार को हमारी छुट्टी होती है जिसके कई फ़ायदे हैं जैसे कि अगर सरकारी ऑफ़िस में कोई काम है तो वह आप इस दिन कर सकते हैं। अगर यह छुट्टी रविवार को होती तो यह काम नहीं किया जा सकता 101 वर्ष पुराने इस स्कूल में छात्र से लेकर शिक्षक तक, किसी को भी इस नियम से कोई परेशानी नहीं होती है। यह भी कहा जाता है कि सरकार ने शुरू में इस नियम पर आपत्ति की थी पर जब उन्हें स्कूल के नियम और इसके पीछे के इतिहास के बारे में पता चला तो इसे मान लिया गया।