- काफी दिन से आ रही है खांसी तो हो जायें अलर्ट
एबीएन सोशल डेस्क। इन दिनों जहां देखों वहां खांसी का कहर जारी है। अमूमन ऐसी भयंकर खांसी की दिक्कत तब देखी गयी थी जब कोरोना अपने पीक पर था और लोगों के अंदर उसकी दहशत थी, लेकिन अब बिल्कुल वैसा ही टॉर्चर लोग फिर महसूस कर रहे हैं।
लोगों में इस बात को लेकर कंफ्यूजन है कि क्या ये कोरोना का ही रूप है या कोई नया वायरस जिसकी चपेट में अभी हर चौथा या पांचवां शख्स है। ये ऐसी खांसी है जो एक बार आने के बाद जाने का नाम नहीं ले रही। खांसते-खांसते लोगों के फेफड़े हिल जाते हैं। सांस फूलने लगती है। गले में दर्द होने लगता है। कई बार तो पूरी-पूरी रात खांसते हुए गुज़र जाती है।
चिंता की बात ये है कि पहले जो खांसी 5 या 6 दिनों में ठीक हो जाती थी। उसे इस बार में जाने में 25 से 30 दिन तक का समय लग रहा है। लेकिन क्या आप इसकी वजह जानते हैं। क्या आपको इस बात का अंदाज़ा है कि इस बार खांसी इतनी खतरनाक क्यों है। आपको इस खांसी से बचने के लिए किस तरह की तैयारी करनी होगी। इस खबर में जानिये क्या है यह वायरस और इससे बचने के उपाय...
दरअसल इसके पीछे एक ऐसा अदृश्य वायरस है, जो कोरोना तो नहीं है लेकिन इसके लक्षण बिल्कुल कोरोना जैसे हैं। लेकिन आप मिनी कोविड भी कह सकते हैं लेकिन इसका नाम हैं इंफ्लूएंजा ए – एच3एन2। जो इस वक्त देश के कई शहरों में तेज़ी से फैल चुका है। और हर दिन के साथ इसके मरीज़ों की संख्या बढ़ती जा रही है। आईसीएमआर ने भी इस वायरस को लेकर देश में खतरे का अलार्म बजा दिया है और बिल्कुल कोविड वाली सावधानी बरतने की सलाह की है। क्योंकि कोरोना की तरह इस वायरस से भी संक्रमित लोगों को सबसे ज़्यादा दिक्कत खांसी और बुखार की है।
- करीब 92 फीसदी लोग ऐसे हैं। जो इंफ्लूएंजा ए नाम के इस वायरस की चपेट में आने के बाद बुखार से पीड़ित हैं।
- 86% लोग ऐसे हैं जिन्हें ऐसी खांसी आ रही है, जो एक बार शुरू होने के बाद रुकने का नाम नहीं लेती।
- 27% लोगों को खांसी के साथ साथ सांस लेने में दिक्कत भी महसूस हुई है।
- जबकि 10 फीसदी मरीज़ ऐसे हैं। जिन्हें खांसी और सांस लेने में दिक्कत की वजह से ऑक्सीजन तक की ज़रूरत पड़ गयी।
- इंफ्लूएंजा ए – एच3एन2 से पीड़ित 7 प्रतिशत मरीज़ों को तो आईसीयू में भर्ती कराने की नौबत आ गयी।
खांसी और बुखार के लिए ज़िम्मेदार इंफ्लूएंजा ए को मिनी कोविड क्यों कहा जा रहा है। आप भी उस खतरे को समझिये। - जिस तरह कोरोना सीधे फेफड़ों पर अटैक करता है। वैसे ही इस वायरस की वजह से भी फेफड़ों में बेहद खतरनाक संक्रमण हो रहा है।
- जैसे कोरोना एक शख़्स से दूसरे शख़्स में फैलता है ठीक वैसे ही इंफ्लूएंजा ए नाम का ये वायरस भी एक दूसरे के संपर्क में आने से तेज़ी से फैलता जाता है।
- जिस तरह कोरोना के कई केसेस में मरीज़ों को ठीक करने के लिए डॉक्टर्स स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर रहे थे। वैसे ही इस बार भी कुछ मरीज़ों को ठीक करने के लिए स्टेरॉयड की ज़रूरत पड़ रही है।
- जैसे खतरनाक कोरोना वायरस ने शहर-शहर अस्पतालों में लंबी लाइनें लगवा दी थी। ठीक वैसे ही इस वायरस की वजह से भी अस्पतालों में मरीज़ों की संख्या बढ़ती जा रही है।
हालांकि जब कोई समस्या होती है, तो उसका समाधान भी निश्चित होता है। आप खुद इस बात के गवाह हैं कि कोरोना के ख़िलाफ लड़ी गई सबसे बड़ी जंग को देश ने कैसे वैक्सीन और अपनी सावधानी से जीत लिया। एक बार फिर बिल्कुल वैसी ही सावधानी बरतने की जरूरत है। जैसी आपने कोविड काल में दिखाई थी।
आईसीएमआर ने जो गाइडलाइंस जारी की हैं उन्हें यहां पढ़िये…
- हाथों को बार-बार साबुन से धोएं
- भीड़ वाले इलाकों में जाने से बचें
- घर से बाहर निकलते वक्त मास्क का इस्तेमाल करें
- खांसते और छींकते समय मुंह पर हाथ रखें
- बिना हाथों को धोए अपनी आंखों और मुंह को ना छुएं
- गर्म पानी पिएं और खांसी के लक्षण दिखने पर भाप लें
- नमक के गुनगुने पानी से गरारा करें
- बुखार या बदन दर्द की स्थिति में पैरासिटामॉल लें
- सबसे जरूरी शुरुआती लक्षण दिखने पर खुद को आइसोलेट करें
गौर करें तो ये सारी वहीं सावधानियां हैं, जो आपसे कोरोना के दौर में रखने के लिए कही जा रही थीं। क्योंकि इंफ्लूएंजा ए को भी डॉक्टर कोरोना जैसा ही बता रहे हैं। इसीलिए एक बार फिर से अलर्ट मोड में आने का वक्त आ चुका है। क्योंकि सावधानी से ही आपकी सेहत की सत्ता दुरुस्त रहेगी।