- किसान फूलगोभी की खेती से भी कर सकते हैं अच्छी कमाई
- जानें उन्नत किस्में और बुवाई का तरीका
एबीएन सोशल डेस्क। फूलगोभी एक लोकप्रिय सब्जी है। भारत में इसकी कृषि का कुल क्षेत्रफल लगभग 3000 हेक्टर है, जिससे तकरीबन 6,85,000 टन उत्पादन होता है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तथा अन्य शीतल स्थानों में इसका उत्पादन व्यापक पैमाने पर किया जाता है। वहीं महाराष्ट्र में फूलगोभी की खेती लगभग 7000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। वर्तमान में इसे सभी स्थानों पर उगाया जाता है। फूलगोभी की खेती पूरे वर्ष की जाती है और फूलगोभी भारत वर्ष की शीतकालीन गोभी वर्गीय सब्जियों में एक प्रमुख सब्जी है।
इसमें फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, चूना, सोडियम, आयरन और विटामिन ए जैसे खनिजों से भरपूर होती हैं। इसलिए इस सब्जी की फसल आहार में महत्वपूर्ण है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक पौधा लगाने के 60-80 दिन तथा देर से तैयार होने वाली किस्म से 100-120 दिन में गोभी तैयार हो जाती है।
फूल गोभी की खेती के लिए सही मौसम : सर्दियों की जलवायु इस फसल के अनुकूल है। आमतौर पर 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि के लिए अनुकूल होता है। चूंकि फूलगोभी की किस्में तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, इसलिए उन्हें उनकी जलवायु आवश्यकताओं के अनुसार चुना जाना चाहिए।
फूल गोभी की खेती के लिए कैसी हो भूमि : गोभी की खेती के लिए सभी प्रकार की अच्छे जल निकास वाली भूमि उपयुक्त होती है, परंतु हल्की एवं दोमट मिट्टी जिसका जल निकास अच्छा होती है। इसके अतिरिक्त भूमि भी अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए जिसमें जलभराव की समस्या न हो तथा उत्तम जीवाश्म वाली मिट्टी हो, जिसका पीएच मान 5.5 से 6.8 के मध्य होना चाहिए।
फूलगोभी की उन्नत किस्में : इसकी खेती मौसम के आधार अगेती, मध्यम और पछेती खेती के लिए वर्तमान समय में फूलगोभी की कई उन्नत किस्म बाजारों में उपलब्ध है। अगेती किस्में – अर्ली, कुंआरी, पूसा कातिकी, पूसा दीपाली, समर किंग पछेती – पूसा स्नोबाल-1, पूसा स्नोबाल-2, पूसा स्नोबाल-16 मध्यम किस्में – पंत सुभ्रा, पूसा सुभ्रा, पूसा सिन्थेटिक, पूसा अगहनी, पूसा स्नोबाल
उर्वरक और पानी का कब करें उपयोग : फूलगोभी के लिए 75 किग्रा एन, 75 किग्रा एस और 75 किग्रा के भी दें। 75 किग्रा एन की दूसरी किश्त रोपण के 1 माह बाद डालें।
रोगों से फसलों को बचाने का उपाय
रोग : फूलगोभी की सब्जियां विभिन्न कीड़ों से प्रभावित होती हैं जैसे कैटरपिलर लार्वा, पत्ता गोभी पर पत्ता गोभी का मक्खन मक्खी, साथ ही ब्लैक लेग, क्लब रूट, गोनोरिया, सीडलिंग पतन, लीफ स्पॉट जैसे रोग।
उपाय : कीड़ों के संक्रमण के लिए नर्सरी से संक्रमित सब्जियों में एंडोसल्फान 35 सीसी 290 मिली या फॉस्फोमिडॉन 85 डब्ल्यूयूएससी 60 मिली या मैलाथियान 50 सीसी 250 मिली प्रति हेक्टेयर 250 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।