एबीएन सोशल डेस्क। आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस, प्रेस की स्वतंत्रता और जिम्मेदारियों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है। भारत में पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से प्रथम प्रेस आयोग ने एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी। इसके बाद 4 जुलाई, 1966 को प्रेस परिषद की स्थापना की गयी। इस परिषद ने 16 नवंबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। इसी तारीख को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय प्रेस दिवस की शुरुआत हुई।
भारत में प्रेस को वाचडॉग और भारतीय प्रेस परिषद को मोरल वाचडॉग कहा गया है। 1966 में आज ही के दिन पीसीआई ने यह सुनिश्चित करने के लिए नैतिक प्रहरी के रूप में कार्य करना शुरू किया था कि न केवल प्रेस इस शक्तिशाली माध्यम से अपेक्षित उच्च मानकों को बनाए रखे, बल्कि यह भी कि यह किसी बाहरी कारकों के प्रभाव और खतरों से प्रभावित न हो। आइए अब प्रेस परिषद की संरचना और कार्यों को समझते हैं। भारतीय प्रेस परिषद एक वैधानिक निकाय है, जिसे मीडिया के संचालन की निगरानी का अधिकार है।
प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 से यह अपना जनादेश प्राप्त करता है। इसके एक अध्यक्ष होते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज होते हैं। उनके अलावा 28 अन्य सदस्य होते हैं, जिनमें से 20 प्रेस से होते हैं, पांच संसद के दोनों सदनों से नामित होते हैं और तीन प्रतिनिधित्व करते हैं। भारतीय प्रेस परिषद एक अर्ध-न्यायिक निकाय है जो प्रेस के प्रहरी के रूप में कार्य करता है। यह नैतिकता के उल्लंघन, प्रेस की स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए और प्रेस की शिकायतों के मामले में निर्णय करता है। भारतीय प्रेस परिषद देश में एक स्वस्थ लोकतंत्र को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह भी सुनिश्चित करती है कि भारत में प्रेस किसी बाहरी मामले से प्रभावित न हो। वर्तमान में भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुईं न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई हैं। वह परिषद की पहली महिला अध्यक्ष बनाई गई हैं। इसी साल 18 जून को उनकी नियुक्ति हुई है। वह जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग, उत्तराखंड यूनिफार्म सिविल कोड ड्राफ्टिंग कमेटी समेत कई अहम समितियों की सदस्य रह चुकी हैं। भारतीय प्रेस परिषद में अभी भी सदस्यों के 28 में कई पद खाली पड़े हैं।