विचार
अयोध्या : प्रभु श्रीराम का जन्म और उनकी जल समाधि स्थल...
ABN Bureau
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20 Oct, 2022
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एबीएन एडिटोरियल डेस्क (अयोध्या से लौटकर मुरलीधर)। अयोध्या में श्री राम का जन्म और अयोध्या में ही भगवान राम की जल समाधि। मैं सोचता हूं आखिर गुप्तार घाट नाम क्यों है? क्या राम नहीं है यह मानना अयोध्यावासियों के लिये कठिन था, असंभव सा। इसलिये उनके मन ने माना कि राम गप्त हो गये सरयू में। इस जल समाधि के स्थान पर जाकर रामत्व का अनुभव होता है। जब मैंने वहां जाने की बात कही तब आॅटो वाला बोला घाट पर बाढ़ है डूबा है। मैंने कहा जहां हमारे राम डूबें हो वहां ही तो जाना है शेष जीवन तो रामलीला करता ही रहा हूं। कैंट इलाके से होता वहां पहुंचा। पानी घट रहा था। शाम का वक्त। सरयू मईया की आरती। मकई बेचती लड़की। और मंदिर के पुजारी कहते हैं कि 1955 के बाद ऐसी बाढ़ नहीं देखी। मंदिर से पानी आज ही अभी निकला है। अचानक पानी बढ़ता है दस मिनट तक अफरा तफरी फिर शांति। घाट से सटा उपर तक सरयू मानसरोबर से निकल कर छपरा में गंगा से मिलने तक अयोध्या की धरा को राम के स्मृतियों में अपने ऊंचे स्थान पर जैसे गर्व कर रही हो। लगा सरयू कह रही हो अवश्य देखिये देखन योगा। रामनगरी अयोध्या का जिक्र आते ही आपके दिल-दिमाग में भगवान राम के जन्मस्थली की तस्वीर कौंध जाएगी, जहां वह बाल लीलायें किया करते थे। भगवान की स्मृतियों को समेटे राम नगरी में वैसे तो कई दर्शनीय स्थल हैं, लेकिन गुप्तार घाट की अपनी अलग ही विशेषता है। यह वह घाट है, जहां भगवान श्रीराम ने जलसमाधि ली थी। सरयू नदी के किनारे स्थित गुप्तार घाट पर कई छोटे-छोटे मन्दिरों के साथ यहां का सुन्दर दृश्य मन को मोह लेने वाला है। मुक्ति पाने की इच्छा लेकर इस स्थान पर दर्शनार्थी आते हैं। 19वीं सदी में राजा दर्शन सिंह द्वारा गुप्तार घाट का नवनिर्माण करवाया गया था। इस घाट पर राम जानकी मंदिर, पुराने चरण पादुका मंदिर, नरसिंह मंदिर और हनुमान मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र हैं।
गुप्तार घाट के पास ही मिलिट्री मन्दिर, कम्पनी गार्डन, राजकीय उद्यान और अन्य प्राचीन मन्दिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। नौका विहार और लम्बे रेतीले मैदानों के इर्द-गिर्द हरियाली व शान्त वातावरण और सूर्यास्त की निराली छटा लोगों को बरबस अपनी ओर खींच लेती है। बक्सर की युद्ध विजय के बाद तत्कालीन नवाब शुजा-उद-दौला द्वारा निर्मित ऐतिहासिक किला, गुप्तार घाट से चंद कदमों की दूरी पर स्थित है।
...जब अयोध्या उजड़ सी गई थी
मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के साथ ही कीट-पतंग तक उनके दिव्य धाम चले गये, जिसके चलते अयोध्या उजड़ सी गई थी। बाद में उनके पुत्र कुश ने इस नगरी को फिर से बसाया। प्राचीन इतिहास के मुताबिक, महाराज विक्रमादित्य ने अयोध्या नगरी को बसाया था। अयोध्या में गुप्तार घाट के अलावा ऋणमोचन घाट, लक्ष्मण घाट, शिवाला घाट, जटाई घाट, अहिल्याबाई घाट, धौरहरा घाट, नया घाट और जानकी घाट काफी मशहूर हैं।
जीवन का आंरभ यानी आपका जन्म आपके वश में नहीं लेकिन अंत तो महान जनों का भगवान राम का निश्चित ही दुनिया का श्रेष्ठ स्थल ही होगा इस पर बहस कहां है? जिन्होंने बहस किया तर्क किया कुतर्क किया उन्हें पता नहीं हमारे राम तो तर्कातिक हैं, वश गुप्त हुए है अयोध्या के गुप्तार घाट पर।
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