Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
समाज

बुन्देलखण्ड के खेतों में लहलहा रहा काला सोना, हल्दी बेच लखपति बने आकाश

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
बुन्देलखण्ड के खेतों में लहलहा रहा काला सोना, हल्दी बेच लखपति बने आकाश
विज्ञापन
एबीएन सोशल डेस्क। काला सोना अर्थात काली हल्दी! बुंदेलखंड के खेतों में काले सोने की फसल लहलहा रही है। एमपी के सागर, टीकमगढ़ व यूपी के झांसी, महोबा में किसान ब्लैक गोल्ड कहलाने वाली काली हल्दी की खेती से लखपति बन रहे हैं। बता दें कि काली हल्दी की खेती मूलतः ठंडे प्रदेश और हिमालय के पहाड़ी इलाकों में होती है, लेकिन सागर में मल्टीलेयर फॉर्मिंग से पहचाने जाने वाले युवा किसान आकाश चौरसिया ने सागर सहित बुंदेलखंड में काली हल्दी की खेती शुरु की है। वे काली हल्दी के अलावा सफेद और पीली हल्दी की खेती भी कर रहे हैं। काली हल्दी का उपयोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी सहित दर्जनों अन्य बीमारियों के इलाज में होता है। आकाश परंपरागत खेती के साथ जैविक खेती, मल्टीलेयर फॉर्मिंग, विष रहित और गो-आधारित खेती के एक्सपर्ट के रूप में पहचाने जाते हैं। काली हल्दी शायद ही आपने देखी हो, हल्दी सामान्यतः पीली होती है। बुंदेलखंड के सागर में मल्टीलेयर फॉर्मिंग करने वाले युवा किसान आकाश चौरसिया अपने खेतों में तीनों प्रकार की हल्दी की फसल लगाये हुए हैं। वे बीते दो साल में 5 एकड़ खेत से 20 लाख रुपए से अधिक की हल्दी बेच चुके हैं। वे पूरे मप्र और यूपी के बुंदेलखंड में किसानों को हल्दी की खेती भी सिखा रहे हैं। परंपरागत खेती की अपेक्षा काली, सफेद और पीली हल्दी की फसल ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही हैं। इसमें देखरेख कम लगती है और मुनाफा ज्यादा होता है। आकाश बताते हैं कि उन्होंने चार साल पहले पीली हल्दी की फसल लगायी थी। इसमें खासा मुनाफा हुआ तो उन्होंने रकबा बढ़ाकर दो गुना कर दिया। अन्य किसानों को भी हल्दी की खेती के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने सागर के आसपास के इलाके सहित टीकमगढ़ यूपी के झांसी और महोबा के ऐसे किसान जो जैविक खेती को अपना रहे हैं, उनको हल्दी के खेती के लिए प्रेरित किया है। बुंदेलखंड के कई किसान अब काली और पीली हल्दी की खेती कर रहे हैं। उनको बेहतर क्वालिटी का बीज भी उपलब्ध कराया है। काली हल्दी को औषधि के रूप में उपयोग में लिया जाता है। जबकि पीली हल्दी को भोजन में स्वाद, रंग बढ़ाने व एंटीबायोटिक के रुप में उपयोग किया जाता है। सफेद हल्दी के पाउडर को मेडिसिन के रुप में उपयोग किया जाता है। काली हल्दी गीली स्वरुप में एक हजार से डेढ़ हजार रुपये किलो तक बिकती है, जबकि इसका पाउडर 3 से 4 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकता है। सफेद हल्दी के भी अच्छे रेट मिलते हैं जबकि पीली हल्दी गीली में 40 रुपये प्रति किलो बिकती है। इसका पाउडर 300 से 400 रुपये तक में बिकता है। काली हल्दी का तेल भी बनाया जाता है। इसकी बाकायदा एक पूरी प्रक्रिया होती है। इसमें हल्दी के पौधे के पत्तों का भी उपयोग किय जाता है। हल्दी पाउडर और हल्दी का तेल इंसान के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करते हैं। हल्दी का तेल काफी ऊंचे दामों पर बिकता है। हालांकि सागर के स्थानीय बाजार में हल्दी के तेल की खपत नहीं है। इसके लिए सागर और प्रदेश के बाहर के बाजार में बेचना होता है।
विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 36,596