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दुनिया की सुखांत प्रेम कथा शिव और सती की : पंडित रामदेव

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दुनिया की सुखांत प्रेम कथा शिव और सती की : पंडित रामदेव
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टीम एबीएन, रांची। दुनिया का सुखांत प्रेम कथा शिव सती की है। इसमें पार्वती के रूप में पुन: शिव शक्ति मिलन के रूप में है। शिव की बात भले सती नहीं मानती है, पर सती इसलिए पिता दक्ष के यज्ञ में जलती है कि वह शिव का सामूहिक अपमान नहीं सहन कर सकती है। यह दाम्पत्य की गरिमा है। इसके बाद भी सती शिव चरण का ध्यान कर जन्म जन्म शिवपद अनुरागी की अनुमति लेकर पार्वती के रूप में जन्म लिया है। सती का प्राणांत के बाद शिव सती के राख को पूरे शरीर में लगाकर भष्मीभूत हो गये और श्मशान के राख को सती का राख समझकर लगाने लगे। हर श्मशान के लाश के मुंड को सती का माथा समझकर पहनने लगे, तो कपालमाली कहलाये। यही है स्नेह, प्रेम। इसके बाद सती ही पार्वती के रूप मे जन्म ली। पार्वती ने कहा- वरहु शंभु न तो रहहीं कुमारी... और शिव और पार्वती का विवाह हुआ। यह है दाम्पत्य और भारतीय दाम्पत्य का उदाहरण। उक्त बातें पंडित रामदेव पाण्डेय ने भागवत कथा के चौथे दिन महिला भक्ति परिषद् रांची युनिवर्सिटी बरियातू में कही। बताते चलें कि कल कृष्ण जन्म की कथा होगी। कथा के आरंभ में विपिन सिंह ने आचार्य को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इसे सफल बनाने में जगदीश पांडेय, मुन्ना पाण्डेय, गायत्री मिश्रा का योगदान सराहनीय रहा।
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