टीम एबीएन, रांची। भागवत कथा व्यास सुखदेव जी मनोविज्ञानी आचार्य हैं। कहते हैं कि भौतिक शरीर में परमार्थिक शरीर का चिंतन करो और ओम का मानसिक जप करो। इस शरीर के विराट पुरुष का चिंतन करो, तो विराट हो जाओगे। ऐसा यदि आमजन भी करते हैं तो इसका लाभ होगा। आप भी जो रोज कुछ मिनट के लिए पूजन काल में अपने शरीर में विराट पुरुष की अनुभूति करेंगे और ओम का मानसिक जप करेंगे। उन्हें रोग, शोक से मुक्ति मिलेगी। यह भागवत का दर्शन है। परिक्षित शुक से सृष्टि का विकास क्रम पूछते हैं। यह डार्विन के विकासवाद से भिन्न है। डार्विन के बाप दादा बंदर-मेढक हैं, तो उन्होंने कहा कि हम बंदर-मेढक की संतान हैं। शुक ने कहा ब्रह्मा, विष्णु महेश और दुर्गा ही ओम है। इसी ओम ने ब्रह्मांड में बिग बैंग का विस्फोट कराया। इससे पंचतत्व बना। इसी पंचतत्व से दुनिया बनी। शिव ने अर्धनारीश्वर होकर स्त्री रूप दिखाया। नर-नारी का डेमो दिखाया और ब्रह्मा ने दो क्रम से सृष्टि का विकास किया। एक से दक्ष, मनु, कश्यप, दिति-अदिति तो दूसरी तरफ अवतारवाद से मछली, कछुआ, वराह, नरसिंह, वामन, राम और कृष्ण जैसे महामानव। राजा दक्ष की साठ बेटियों से मनुष्य, राक्षस, पशु पक्षी, नाग आदि का वंश चला है। यही है सृष्टि का विकास और तब से लेकर कृष्ण के परधाम गमन तक की कथा भागवत में है। इसमें ज्ञान-विज्ञान की वैसी कथाएं हैं जो आज का विज्ञान पांच हजार साल बाद भी नहीं कर सकता। उक्त बातें भागवत कथावाचक पंडित रामदेव पांडेय ने कही। बताते चलें कि उनके पौरोहित्य में महिला भक्ति परिषद् रांची युनिवर्सिटी कॉलोनी में भागवत कथा सप्ताह चल रही है।