एबीएन नॉलेज डेस्क। विज्ञान की दुनिया के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि आज से एक बार फिर से इंसानों को चंद्रमा पर भेजने का मिशन लॉन्च हो रहा है और पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक घटना का साक्षी बनेगी, क्योंकि आज से करीब 53 साल पहले पहली बार इंसानों ने चंद्रमा की सतह पर कदम रखा था, जब नील आर्मस्ट्रॉंग को चंद्रमा पर भेजा गया था और अब एक बार फिर से नासा इंसानों को चंद्रमा पर भेजने वाला है, जिसके लिए सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और मिशन का पार्ट-1 आज लॉन्च होने वाला है। दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट अपने लॉन्च पैड पर पहुंच चुका है और आज आर्टिमिश मिशन-1 का पहला पार्ट लॉन्च होने वाला है। अमेरिका के फ्लोरिडा स्थिति लॉन्च पैड से नासा अपने आर्टिमिश मिशन-1 के पहले पार्ट को लॉन्च करेगा, जिसके तहत एक खाली कैप्सूल को चांद की सतह पर उतारा जायेगा। मिशन के पहले पार्ट में किसी इंसान को चांद पर नहीं भेजा जायेगा और इस खाली कैप्सूल का नाम आरोयन (Orion) है, जो 6 फीट लंबा है। ओरायन कैप्सूल इस मिशन मे काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और ये 42 दिनों के वापस धरती पर लौट आयेगा। ओरायन कैप्सूल इसलिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिये सिस्टम और प्रक्रिया पर परीक्षण किया जायेगा और 42 दिनों के बाद 10 अक्टूबर को धरती पर इसकी वापसी होगी। आर्टेमिस -1 फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा और एक बार पार्ट-1 कामयाब होने के बाद पार्ट-2 की तैयारी शुरू हो जायेगी। स्पेस लॉन्च डेल्टा 45 से जुड़े मौसम विज्ञानियों ने सोमवार को लॉन्च के लिए अनुकूल मौसम की 70 प्रतिशत संभावना की भविष्यवाणी की है। हालांकि, नासा ने 2 घंटे का लॉन्चिंग विंडो रखा है और अगर मौसम खराब होती है, तो नासा के पास कुछ एक्स्ट्रा टाइम भी होगा। 29 अगस्त को दो घंटे की लॉन्च विंडो में अंतरिक्ष यान के पहले प्रक्षेपण को लक्षित किया जा रहा है। लिफ्ट-ऑफ वर्तमान में सोमवार यानि 29 को सुबह 8:33 बजे EDT या शाम 6 बजे IST के लिए निर्धारित है। इसके उड़ान को नासा के आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है। नासा का ये रॉकेट 322 फुट यानि 98 मीटर का है और अपोलो मिशन के 50 सालों के बाद चंद्रमा के दूर इलाके में इसे उतारा जाएगा। नासा के हाईटेक, स्वचालित ओरियन कैप्सूल का नाम नक्षत्र के नाम पर रखा गया है, जो रात के आसमान में सबसे चमकीला है। ये अपोलो के कैप्सूल की तुलना में काफी विशाल है, जिसमें तीन के बजाए चार अंतरिक्ष यात्री बैठ सकते हैं। नासा का लक्ष्य साल 2025 में दो अंतरिक्षयात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारना है।