ज्ञान विज्ञान
पृथ्वी और सूरज के बीच बुलबुला बनाने की तैयारी, क्या छाता बनाकर रेडिएशन रोक पायेंगे वैज्ञानिक?
ABN Bureau
•
22 Jun, 2022
•
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एबीएन नॉलेज डेस्क। जलवायु परिवर्तन लगातार और भयानक सूखा, तूफान, हीट वेभ और ग्लेशियर की वजह से समुद्री जलस्तर बढ़ने का कारण बन रहा है और इस विनाश को रोकने के लिए एमआईटी के वैज्ञानिकों ने सूर्य और पृथ्वी के बीच "स्पेस बबल्स" बनाने का प्रस्ताव दिया है। शोधकर्ताओं की कोशिश है कि सूरज और पृथ्वी के बीच एक विशालकाय बुलबुले का निर्माण किया जाए, ताकि सूरज से धरती की तरफ आने वाली भयानक रेडिएशन को धरती पर पहुंचने से रोका जा सके। वैज्ञानिकों की इस इस जियोइंजीनियरिंग के विचार के मुताबिक, ब्राजील के आकार के एक गोलाकार बुलबुले, जिसे वैज्ञानिक भाषा में इन्फ्लेटेबल बुलबुला कहा जाता है, उसका निर्माण पृथ्वी और सूर्य के बीच किया जाएगा, ताकि रेडिएशन को हमारे ग्रह से टकराने से रोका जा सकेगा। वैज्ञानिकों की टीम ने एक प्रेस रिलीज में कहा है कि हम सूरज और पृथ्वी के बीच स्पेस बबल का निर्माम करना चाहते हैं, जिसे लिक्विड सिलिकॉन से बनाया जाएगा और उसे विशालकाय बुलबुला बनाकर सूरज और पृथ्वी के बीच अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा करने से सूरज से आने वाली रेडिएशन की किरणें परावर्तित हो जाएंगी और हमें अंतरिक्ष में बड़ी बड़ी फिल्म लांच करने की भी जरूरत नहीं होगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि सूरज से आने वाले रेडिएशन को इस स्पेस बुलबुले के जरिए पूरी तरह से नहीं रोका जा सकता है, हां उसे रेडिएशन को कम जरूर किया जा सकता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है, कि ये जलवायु परिवर्तन से निपटने के मौजूदा प्रयासों को रिप्लेस कर देगा। हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जो भी मौजूदा उपाए किए जा रहे हैं, उनमें से ये सबसे ज्यादा बेहतर है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये एक तरह से सूरज और पृथ्वी के बीच सिलिकॉन से छाता बनाने जैसा है, जो रेडिएशन को बहुत हद तक रोक सकेगा। वहीं, एमआईटी की सेंसेबल सिटी लैब के मुताबिक, अंतरिक्ष में पृथ्वी और सूरज के बीच बुलबुले का टेस्ट किया जा चुका है और एमआईटी के वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सूरज के रेडिएशन को रोकने के लिए अंतरिक्ष बुलबुलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष में किया जाने वाला ये उपाए आने वाले दिनों में काफी सुरक्षित होंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि, अगर हम धरती पर टकराने से पहले 1.8 प्रतिशत सौर रेडिएशन को परावर्तित कर देते हैं, तो हम आज की ग्लोबल वार्मिंग को पूरी तरह से उलट सकते हैं।
एमआईटी वैज्ञानिकों की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि अंतरिक्ष में पृथ्वी और सूरज के बीच जिस बुलबुले का निर्माण किया जाएगा, उसे कभी भी नष्ट किया जा सकता है। इससे सौर जियोइंजीनियरिंग समाधान पूरी तरह से प्रतिवर्ती हो जाएगा और अंतरिक्ष मलबे को काफी कम कर देगा। वैज्ञानिकों ने कहा कि पृथ्वी और सूर्य के बीच का वो क्षेत्र, जहां जेम्स वेब टेलीस्कॉप स्थिति है, वहां पर अंतरिक्ष बुलबुले को रखा जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि, सूरज से निकलने वाले रेडिएशन को परावर्तित करने के लिए वो सबसे सही स्थान है।
स्पेस बबल्स रिसर्च प्रोजेक्ट वैज्ञानिक जेम्स अर्ली के विचारों पर आधारित है, जिन्होंने पहले लैग्रैंगियन पॉइंट पर एक डिफ्लेक्टिव ऑब्जेक्ट को तैनात करने का सुझाव दिया था, और खगोलविद रोजर एंजेल, जिन्होंने बबल-बेड़ा का प्रस्ताव रखा था। हालांकि जियो इंजीनियरिंग एक साइंस फिक्शन फिल्म की तरह लगती है, लेकिन इसका इस्तेमाल वास्तविक दुनिया में किया जा रहा है। पिछले साल, संयुक्त अरब अमीरात ने 122 डिग्री फ़ारेनहाइट तक के तापमान को कम करने के लिए दुबई में बारिश बनाने के लिए जियो इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया था। बादल का निर्माण ड्रोन तकनीक का उपयोग करके किया गया था, जिसमें बारिश करवाने के लिए बिजली का झटका दिया गया था।
2021 में जारी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिंग एंड मेडिसिन (NASEM) की एक रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए और वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने के लिए पृथ्वी के महासागरों को जियोइंजीनियरिंग करने का प्रस्ताव दिया था। इस आइडिया के तहत छोटे प्रकाश संश्लेषक के विकास को बढ़ाने के लिए उर्वरक जोड़ना, क्षारीयता को बढ़ावा देने के लिए पानी के माध्यम से विद्युत धाराओं को पारित करना और समुद्री जल के कैमिकल साइंस को बदलना शामिल है। स्कॉट डोनी, जो वर्जीनिया विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान में प्रोफेसर हैं और इस रिपोर्ट के लेखक हैं, उन्होंने एक बयान में कहा कि महासागर कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की रणनीतियों पर पहले से ही वैज्ञानिकों, गैर-सरकारी संगठनों और द्वारा चर्चा की जा रही है। संभावित जलवायु प्रतिक्रिया रणनीतियों के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
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