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वाजिब बात... चप्पल उड़ तो नहीं सकता, फिर कैसे बना ‘हवाई’?

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वाजिब बात... चप्पल उड़ तो नहीं सकता, फिर कैसे बना ‘हवाई’?
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एबीएन नॉलेज डेस्क। हवाई चप्पल तो आप सभी पहनते होंगे! मतलब स्कूल, कॉलेज, दफ्तर वगैरह भले ही जूते पहनकर जाते होंगे, लेकिन घर पर, मॉर्निंग वॉक वगैरह करते समय आप हवाई चप्पल ही पहनते होंगे! दिनभर जूते पहनने के बाद घर लौटकर हवाई चप्पल में जो आराम मिलता है, वह और कहां! चमड़े के चप्पल-जूते या फिर डिजाइनर फुटवियर एक तरफ और हवाई चप्पल एक तरफ। हवाई चप्पल को स्लीपर भी कहा जाता है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके अलग नाम हो सकते हैं, लेकिन भारत में हम सभी इसे हवाई चप्पल ही कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, इसका नाम हवाई चप्पल कब और क्यों पड़ा? दो फीते वाले इस हवाई चप्पल का डिजाइन बहुत ही पुराने समय से चला आ रहा है। न केवल भारत, बल्कि चीन, जापान, अमेरिका समेत दुनिया के अलग-अलग देशों में इस तरह की चप्पलों की पुरानी तस्वीरें मिलती हैं। हालांकि सवाल ये है कि इसका नाम हवाई चप्पल ही क्यों पड़ा। ये हवाई शब्द इसमें क्यों और कैसे जुड़ा, इसकी कहानी दिलचस्प है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दो पट्टे वाली चप्पल के नाम में हवाई जुड़ा, अमेरिका में मौजूद हवाई आईलैंड की वजह से। दरअसल, इस आइलैंड पर टी नाम का एक पेड़ होता है, जिससे रबरनुमा फैब्रिक तैयार कर के चप्पलें बनाई जाती हैं। शुरुआत में इसी वजह से इस चप्पल के नाम में हवाई शब्द जुड़ गया और यह हवाई चप्पल हो गया। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवा जैसी हल्की होने के कारण इसके नाम में हवाई शब्द जुड़ा। इसके इतिहास के बारे में बताया जाता है कि वर्ष 1880 में जापान के गांवों से मजदूरों को फैक्ट्रियों, कल-कारखानों और खेतों में काम करने के लिए अमेरिका के हवाई आईलैंड लाया गया था। उन्हीं के साथ चप्पलों का यह डिजाइन हवाई आइलैंड पहुंचा। वर्ष 1932 में कोबलर एल्मर स्कॉट ने हवाई आइलैंड पर चप्पल बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रबरनुमा फैब्रिक को जापानी डिजाइन में ढाला और हवाई चप्पलें अस्तित्व में आईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई चप्पलों का सबसे पहले इस्तेमाल प्रथम विश्वयुद्ध और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने किया था। हवाई चप्पल का नाम फेमस करने के पीछे हवाइनाज की भूमिका बताई जाती है, जो ब्राजील का एक फुटवियर ब्रांड है। वर्ष 1962 में हवाइनाज ने रबर की चप्पलें लॉन्च की थीं। नीली स्ट्रिप के साथ सफेद-नीले रंग की ये वही चप्पलें थीं, जिसकी तस्वीर हवाई चप्पल का नाम लेते ही हमारे जेहन में उभरती है। वहीं भारत के घर-घर में हवाई चप्पल को पहुंचाने में बाटा कंपनी की भूमिका मानी जाती है।
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