एबीएन सेंट्रल डेस्क। मादा ऑक्टोपस कभी भी अपने बच्चों को नहीं देख पाती। वह अंडे देने के बाद आत्महत्या कर लेती है। वह आत्महत्या का जो तरीका चुनती है वो और भी ज्यादा रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यह दावा ऑक्टोपस पर हुई हालिया रिसर्च में किया गया है। रिसर्च करने वाली शिकागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, मादा ऑक्टोपस अंडे देने के बाद खुद को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर देती है, जानिए, ऐसा क्यों और कैसे होता है। शोधकर्ताओं का कहना है, मादा ऑक्टोपस अंडे देने के बाद धीरे-धीरे भोजन लेना बंद कर देती है। खुद को नुकसान पहुंचाने लगती है। शरीर से स्किन को नोचना शुरू कर देती है। अपने टेन्टेकल्स के ऊपरी हिस्से को काट देती है। जब तक इसके बच्चे अंडे से बाहर निकलते हैं जब तक मादा ऑक्टोपस की मौत हो चुकी होती है। सबसे चौंकाने वाली बात है कि कुछ ही समय बाद बच्चों के पिता यानी नर ऑक्टोपस की मौत भी हो जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है, नर और मादा ऑक्टोपस संभोग करते हैं। इसके बाद मादा ऑक्टोपस के हार्मोंस में कोलेस्ट्रॉल से जुड़े बायोकेमिकल पाथवेज में बदलाव होता है। इनके जीवन में भी कोलेस्ट्रॉल अहम रोल निभाता है। इनके शरीर में ऑप्टिक ग्लैंड होती है। नर और मादा के बीच मेटिंग के बाद यह ग्लैंड सेक्स हॉर्मोन, इंसुलिन और कोलेस्ट्रॉल को अधिक बनाने लगती है। यही तीनों मॉलिक्यूल ऑक्टोपस की मौत की वजह बनते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ऑक्टोपस के शरीर में जब ये बदलाव होते हैं तो वो पागलों की तरह व्यवहार करने लगते हैं और खुद को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। मौत से पहले इनका व्यवहार बदला-बदला नजर आता है। आसान भाषा में समझें तो आंखों के बीच मौजूद ऑप्टिक ग्रंथि ही ऑक्टोपस की समय से पहले से मौत के लिए जिम्मेदार होती है। साइंसअलर्ट की रिपोर्ट में शिकागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, अगर ऑक्टोपस के शरीर से इस ग्रंथि को हटा दिया जाए तो इतनी जल्दी उसकी मौत नहीं होगी। वह अंडे देने के बाद भी कई महीनों तक जीवित रह सकेगी। रिसर्च में यह साबित भी हुआ है।