एबीएन नॉलेज डेस्क। ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि वैज्ञानिक अभी तक इसके कुछ ही रहस्यों के बारे में जान पाए हैं। वैज्ञानिक को यह पता लगाने में कामयाबी हासिल की है कि ब्रह्मांड में मिल्की वे की तरह कई गैलेक्सी भी हैं। हर गैलेक्सी अपना अलग सिस्टम है। अब इस बीच वैज्ञानिकों ने हमारे सौर मंडल के बाहर बाहर दो नए ग्रहों की खोज की है। इसके अलावा उन्होंने 30 धूमकेतु का भी पता लगाया है। यह धूमकेतु सूर्य की ही तरह बीटा पिक्टोरिस स्टार का चक्कर लगाते हैं। बीटा पिक्टोरिस की खोज करीब 40 साल पहले हुई थी जो एक मलबे की डिस्क से घिरा हुआ है। यह डिस्क गैस और धूल के गुबार से घिरा हुआ है। इन ग्रहों को देखने के बाद वैज्ञानिकों में काफी उत्साह है। हमारा सौर मंडल 4.5 अरब साल पुराना है, तो वहीं 20 मिलियन साल पुराना बीटा पिक्टोरिस है। वैज्ञानिक इसी के माध्यम से ग्रहों के निर्माण को समझ सकते हैं। धरती से 63 प्रकाश वर्ष दूर हैं ग्रह : एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, धरती से यह दोनों ग्रह करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित हैं। इसलिए इनकी रोशनी को धरती तक पहुंचने में 63 साल लगते हैं। वैज्ञानिकों ने धूमकेतु को साल 1987 की शुरुआत में खोजा था जो सूर्य जैसे तारे की परिक्रमा कर रहे हैं। नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट से बीटा पिक्टोरिस सिस्टम का 156 दिनों तक जांच पड़ताल किया गया। यह जांच पड़ताल एक इंटरनेशनल रिसर्च टीम ने की है। धमकेतु खोजने के अलावा शोधकर्ताओं ने उनके आकार का भी पता लगा लिया है। इनका आकार हमारे सौर मंडल में मिलने वाले धूमकेतुओं जैसा ही है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि इनका आकार करीब 3 से 14 किमी वृत का है। वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारे सौरमंडल के बाहर मिले किसी धूमकेतु के आकार का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है। साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, हमारे सौर मंडल में जो धूमकेतु मिलते हैं वह अंतरिक्ष में घूमने वाली दूसरी चीजों से टकराते हैं, तो उनका आकार बदल सकता है। उल्कापिंड और धूमकेतु की किसी ग्रह के निर्माण की शुरुआत में अहम भूमिका होती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि धरती पर जो पानी मिलता है उसका कुछ भाग धूमकेतु के बर्फ से ही पहुंचा है। वैज्ञानिकों के उत्साहित होने की वजह यह है कि दो नए ग्रहों पर इनका कैसा प्रभाव होगा। अब आने वाले समय में वैज्ञानिक इन दोनों के और रहस्यों से पर्दा उठाएंगे।