एबीएन नॉलेज डेस्क। अंतरिक्ष में कई रहस्य छिपे हैं। अंतरिक्ष में रोजाना कई ऐसी गतिविधियां होती हैं, जो हमारे लिए शोध का विषय रही हैं। ऐसी ही एक गतिविधि है उल्का पिंडों की बारिश या टूटते तारों का दिखना। ऐसा ही नजारा शुक्रवार रात से अगले कुछ दिनों तक देखने को मिलेगा। सालाना लिरिड उल्का पिंडों की यह बारिश भारतीय शहरों से भी देखने को मिलेगी। ऐसा नजारा अब 29 अप्रैल तक रोज आसमान में देखा जा सकेगा। हालांकि, विशेषज्ञों को कहना है कि कहीं कहीं पर चांद अपनी रोशनी के जरिये ऐसा नजारा दिखने से रोक सकता है। वहीं, खगोलविदों का मानना है कि चांद की रोशनी की वजह से जब उल्कापिंडों को देखना मुमकिन ना हो तो इसे सुबह तड़के देखा जा सकता है। इस साल इस नजारे को देखने में दिक्कत आएगी क्योंकि चांद इसकी दृश्यता 20 से 25 फीसदी तक कम कर देगा। वहीं विशेषज्ञों ने कहा है कि हर घंटे कम से कम 10-15 उल्कापिंडों को बारिश होगी। इन्हें दिल्ली, कोलकाता के साथ-साथ देश के कुछ अन्य हिस्सों से भी देखा जा सकता है। अगले कुछ दिन रात करीब 8:31 बजे इनकी बारिश चरम पर देखी जा सकती है। नासा के अनुसार लिरिड उल्का पिछले 2,700 वर्षों से देखे जा रहे हैं और रात के आकाश में चमकते धूल के निशान और लकीरों को पीछे छोड़ने के लिए जाने जाते हैं। सितारों के लायरा नक्षत्र के नाम पर इनका नाम रखा गया है। यह उल्का धूमकेतु थैचर द्वारा छोड़े गए मलबे के क्षेत्र का हिस्सा हैं। जो वर्तमान में सूर्य से दूर सौर मंडल के माध्यम से चल रहा है। यह अगले 45 साल में अपनी ट्रैजेक्टरी को उलट देगा। धूमकेतु को लंबी अवधि के धूमकेतु के रूप में वगीर्कृत किया गया है और इसे एक बार सूर्य की परिक्रमा करने में 415 वर्ष लगते हैं। मलबे के क्षेत्र तब बनते हैं जब धूमकेतु छोटे-छोटे टुकड़ों को पीछे छोड़ते हुए गुजरते हैं। पृथ्वी की स्थिति के आधार पर जब यह इन मलबे के क्षेत्रों में पहुंचता है तो उल्का वर्षा बनाने के लिए वातावरण में कई टुकड़े जल जाते हैं। लिरिड उल्का की बारिश करीब 3 बार होगी। 3 महीने तक कोई भी टूटा तारा या उल्का पिंड की बारिश देखने को नहीं मिली है। इसे लेकर विशेषज्ञों में उत्साह है।