मौत के बाद कौन संभालेगा आपका फेसबुक- ईमेल और बैंक खाते? कहीं आपकी डिजिटल संपत्ति न बन जाए मुसीबत, पहले से बरत लें ये सावधानी
एबीएन नॉलेज डेस्क। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके सोशल मीडिया, ईमेल, आॅनलाइन खरीदारी, क्रेडिट कार्ड और मनोरंजन सेवाओं से जुड़े खातों का क्या होगा? क्या परिवार उन्हें बंद कर पायेगा या उनकी डिजिटल संपत्ति तक पहुंच बना सकेगा? कानेर्गी मेलन यूनिवर्सिटी की जेनी तांग और शियोउन (ओवेन) वू के मुताबिक, ज्यादातर लोग इन सवालों पर पहले से विचार नहीं करते।
शोधकर्ताओं ने 60 वर्ष से अधिक उम्र के 21 अमेरिकी वयस्कों से बातचीत कर उनकी डिजिटल संपत्ति और मृत्यु के बाद खातों के प्रबंधन से जुड़ी चिंताओं का अध्ययन किया। कई लोगों ने अपनी भौतिक संपत्ति के लिए वसीयत तो बनवायी थी, लेकिन डिजिटल खातों के लिए कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं की थी।
सिर्फ पासवर्ड लिखकर रखना काफी नहीं
अध्ययन में शामिल ज्यादातर लोग अपने पासवर्ड कागज या डिजिटल फाइल में सुरक्षित रखते थे। कुछ ने परिवार के सदस्यों के साथ पासवर्ड साझा भी किये थे। लेकिन बार-बार पासवर्ड बदलने के कारण सूची को अद्यतन रखना मुश्किल होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल बेहतर विकल्प हो सकता है। इसमें सभी खातों के पासवर्ड सुरक्षित रखे जा सकते हैं। कुछ पासवर्ड मैनेजर में आपातकालीन सुविधा भी होती है, जिसके जरिए उपयोगकर्ता की प्रतिक्रिया न मिलने पर नामित व्यक्ति को पहुंच मिल सकती है।
मोबाइल बंद हुआ तो अटक सकता है खाता
कई आॅनलाइन सेवाओं में दो-स्तरीय प्रमाणीकरण की व्यवस्था होती है। इसमें पासवर्ड के साथ मोबाइल या ईमेल पर भेजा गया एक अतिरिक्त कोड भी जरूरी होता है। ऐसे में व्यक्ति की मृत्यु के बाद मोबाइल नंबर बंद हो जाये या ईमेल तक पहुंच न मिले, तो परिवार के लिए खाते खोलना मुश्किल हो सकता है। इसलिए उन मोबाइल नंबरों, ईमेल और उपकरणों की जानकारी भी सुरक्षित रखनी चाहिए, जिनसे दूसरे खातों तक पहुंच मिलती है। फेसबुक और गूगल जैसी सेवाएं कुछ ऐसी सुविधाएं देती हैं, जिनके जरिए उपयोगकर्ता अपनी मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति को खाता संभालने या डेटा प्राप्त करने के लिए नामित कर सकते हैं।
हैकिंग और फालतू खर्च से बचाने के लिए बनायें सूची
मृत्यु के बाद आॅनलाइन खाते अपने आप बंद नहीं होते। निष्क्रिय खातों का इस्तेमाल हैकर पहचान की चोरी, स्पैम और धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं। वहीं, ओटीटी सेवाओं और डिजिटल पत्रिकाओं की सदस्यता का भुगतान भी जारी रह सकता है। इसलिए सभी डिजिटल खातों की सूची बनाकर स्पष्ट निर्देश देने चाहिए कि किन खातों को बंद करना है, किनका डेटा सुरक्षित रखना है और कहां अंतिम भुगतान करना जरूरी है। पुराने और इस्तेमाल में न आने वाले खातों को समय रहते बंद करना भी बेहतर है।
डिजिटल वसीयत से परिवार की परेशानी होगी कम
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल संपत्ति की योजना भी सामान्य वसीयत की तरह जरूरी है। पासवर्ड, खाते, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण और खातों को बंद करने से जुड़े निर्देश व्यवस्थित रखने चाहिए। इससे परिवार को अनावश्यक भागदौड़ और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है और व्यक्ति की डिजिटल संपत्ति का प्रबंधन उसकी इच्छा के अनुसार हो सकेगा।