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जानें क्या है सनातन संस्कृति में घण्टी के रहस्य का वैज्ञानिक पक्ष

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जानें क्या है सनातन संस्कृति में घण्टी के रहस्य का वैज्ञानिक पक्ष
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राजकुमारी पाण्डेय
  • मंदिरों में घंटिया क्यों बजायी जाती है, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

एबीएन सोशल डेस्क। सनातन धर्म में प्राचीन काल से पूजा-पाठ को महत्व दिया जाता है। जिसके लिए लोग मंदिरों में जाते हैं। सभी मंदिरों में गर्भ गृह के सामने आपको घंटिया दिखाई देंगी। 

आमतौर पर लोग मंदिर के अंदर जाते ही पहले घंटी बजाते हैं। इतना ही नहीं हिंदू धर्म में मंदिरों के बाहर घंटी बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर क्यों मंदिर में जाने से पहले घंटी बजायी जाती है?

दरअसल, सुबह और शाम के समय मंदिरों में पूजा और आरती होती है।जब आरती होती है तो मंदिर परिसर में विशेष लय और धुन में छोटी-छोटी घंटियां बजाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक जब मंदिरों में घंटी बजायी जाती हैं तो मंदिर में स्थापित भगवान की प्रतिमा में चेतना जागृत होने लगती है। उस दौरान पूजा-पाठ करना काफी फलदाई माना जाता है। 

इतना ही नहीं पुराणों में भी बताया गया है कि मंदिर में घंटी बजाने से मनुष्य के कई जन्मों का पाप खत्म हो जाता है।धार्मिक मान्यता के साथ-साथ मंदिर में घंटी बजाने के पीछे वैज्ञानिक वजह भी है।

घंटी बजाने का वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिक मान्यता के मुताबिक जब किसी मंदिर में घंटी बजती है तो वातावरण में कंपन होता और यह वायुमंडल की वजह से काफी दूर तक जाता है। उस दौरान जहां तक घंटी की आवाज सुनाई देती है वहां आसपास जीवाणु विषाणु सब खत्म हो जाते हैं। 

जिससे मंदिर और उसके आसपास का वातावरण भी शुद्ध होता है। इतना ही नहीं धार्मिक मान्यता के मुताबिक मंदिर में घंटी बजाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। इससे लोगों के सुख और समृद्धि के द्वार भी खुलते है।

घंटी बजाने की धार्मिक मान्यता

अयोध्या के प्रसिद्ध कथा वाचक और संत समिति के महामंत्री पवन दास शास्त्री बताते हैं कि घंटी बजाने से जो घंटी का कंपन है वह शरीर के अंदर चैतन्यता को जागृत कर देता है। दूसरी बात यह है कि हम जिस देवता का दर्शन करने जा रहे हैं उस देवता में भी चैतन्यता का संचार हो जाये। 

इतना ही नहीं पूरे वातावरण में चैतन्यता का संचार हो इसलिए मठ मंदिरों में घंटी बजाने का विधान है। घंटी हमेशा फूल की ही बनी होती है। जिसको कांसा कहा जाता है उसके कंपन से सबको चैतन्यता मिलती है।

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