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15 किमी दूर से ही दुश्मन पर हमला कर सकता है मिसाइल वीएल-एसआरएसएएम

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15 किमी दूर से ही दुश्मन पर हमला कर सकता है मिसाइल वीएल-एसआरएसएएम
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने मंगलवार को ओडिशा के तट पर चांदीपुर में जमीन से हवा में मार करने वाली वर्टिकली शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (वीएल-एसआरएसएएम) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। श्छ-रफरअट को भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के अधिकारियों के अनुसार यह मिसाइल लगभग 15 किमी की दूरी पर स्थित दुश्मन के टारगेट को तबाह कर सकती है।डीआरडीओ के अनुसार मिसाइल को बहुत कम ऊंचाई पर स्थित इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य को ध्वस्त करने के लिए वर्टिकल लॉन्चर से दागा गया था। वीएल-एसआरएसएएम मिसाइल की लॉन्चिंग का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की तैनाती करना है। इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की तीन सुविधाओं द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। मिसाइल में समुद्री-स्किमिंग लक्ष्यों सहित निकट सीमा पर विभिन्न हवाई खतरों को बेअसर करने की क्षमता है। समुद्री स्किमिंग की रणनीति का उपयोग विभिन्न जहाज-रोधी मिसाइलों और कुछ लड़ाकू विमानों द्वारा किया जाता है ताकि युद्धपोतों पर रडार द्वारा पता लगाने से बचा जा सके। यह मिसाइल समुद्र की सतह के बेहद करीब से उड़ान भरती हैं और इस तरह इनका पता लगाना और बेअसर करना मुश्किल होता है। इस मिसाइल को 40 से 50 किमी की दूरी पर और लगभग 15 किमी की ऊंचाई पर उच्च गति वाले हवाई लक्ष्यों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। डीआरडीओ के अधिकारियों ने कहा है कि इसका डिजाइन एस्ट्रा मिसाइल पर आधारित है जो कि एक विजुअल रेंज से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। वीएल-एसआरएसएएम मिसाइल की दो प्रमुख विशेषताएं हैं क्रूसिफॉर्म विंग्स और थ्रस्ट वेक्टरिंग। क्रूसिफॉर्म में पंख चार छोटे पंख होते हैं जो चारों तरफ एक क्रॉस की तरह व्यवस्थित होते हैं और प्रक्षेप्य को एक स्थिर मुद्रा देते हैं। वहीं थ्रस्ट वेक्टरिंग अपने इंजन से कोणीय वेग और मिसाइल को नियंत्रित करने वाले थ्रस्ट की दिशा बदलने में मदद करता है। अपने करियर के दौरान कई युद्धपोतों पर काम कर चुके नौसेना के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि नौसेना को अपने युद्धपोत को जहाज-रोधी मिसाइलों और विरोधी विमानों से बचाने के लिए विभिन्न रक्षा तंत्रों को नियोजित करना पड़ता है। सदियों पुरानी विधियों में से एक है चैफ्स - जो दुनिया भर में दुश्मन के रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) मिसाइल से नौसेना के जहाजों की रक्षा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक काउंटरमेजर तकनीक है। दूसरा तरीका एंटी शिप मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए मिसाइलों को तैनात करना है। इन प्रणालियों में एक त्वरित पहचान तंत्र, त्वरित प्रतिक्रिया, उच्च गति और उच्च गतिशीलता होनी चाहिए। श्छ-रफरअट मिसाइल इन सभी गुणों का दावा करता है। हालांकि, भारतीय नौसेना के जहाजों पर तैनाती के लिए तैयार होने के लिए इसे विभिन्न परिस्थितियों और विन्यासों में परीक्षणों से गुजरना होगा।
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