- इसरो सिग्नल भेजता रहा-नहीं जागे विक्रम-प्रज्ञान, क्या खत्म हो गया मिशन चंद्रयान-3?
एबीएन नॉलेज डेस्क। चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद के साउथ पोल पर हैं। पिछले 4 सितंबर को ही इसरो ने इन्हें स्विच ऑफ कर दिया था, ताकि चांद पर नयी सुबह होने पर इनसे फिर काम लिया जा सके, शुक्रवार को इसरो ने लगातार सिग्नल भेजे, लेकिन अभी तक लैंडर और रोवर ने इन्हें रिसीव नहीं किया है।
चंद्रयान-3 मिशन का अगला पड़ाव इसरो के लिए मुश्किल भरा नजर आ रहा है। चांद की सतह पर सो रहे लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान अब तक जाग नहीं सके हैं।
शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ओर से इसे लगातार वेकअप सिग्नल भेजे गये, लेकिन अभी तक इन सिग्नलों को रिसीव नहीं किया गया है। इसरो ने हार न मानने की बात कही है और इस बात का ऐलान किया है कि वह लगातार कोशिश में जुटा रहेगा।
चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर ने चांद पर पूरा एक दिन बिताया। इस दौरान विक्रम और प्रज्ञान के साथ गये पेलोड ने इसरो तक चांद की सतह के बारे में कई जानकारियां भेजीं।
इसरो वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रयान-3 मिशन का उद्देश्य पूरा हो चुका है। अब कोशिश ये है कि विक्रम और प्रज्ञान को एक बार फिर जगाकर अतिरिक्त जानकारियां जुटायी जायें, जिससे आने वाले चंद्र मिशनों में लाभ मिले।
हालांकि अभी ये कोशिश सफल होते नहीं दिख रही है। चांद पर एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है। 23 अगस्त को चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम ने चांद के साउथ पोल पर सफल लैंडिंग कर ली थी।
उसके बाद से तकरीबन 11 दिन तक रोवर ने चांद की सतह से खनिजों, भूकंपीय गतिविधियों और प्लाज्मा के बारे में कई अहम जानकारियां इसरो को उपलब्ध करायी। इस मिशन को 7 सितंबर तक के लिए डिजाइन किया गया था।
हालांकि 3 दिन पहले ही इसरो ने विक्रम और लैंडर को स्विच ऑफ कर दिया था, ताकि इसमें बैटरी बाकी रहे और 14 दिन की रात के बाद जब चांद पर फिर सवेरा हो, तो इन्हें फिर एक्टिव कर दिया जाये। शुक्रवार को इसरो ने यही कोशिश की, जो नाकाम रही।