वैज्ञानिकों ने दी तूफान की चेतावनी
एबीएन नॉलेज डेस्क। सूर्य की सतह पर ब्लैक कलर के होल को कोरोनल होल कहा जाता है। इसकी लंबाई तीन लाख और चौड़ाई चार लाख किलोमीटर है। इसमें बैक टू बैक 20-30 पृथ्वी समा सकती है।
नासा के वैज्ञानिकों को सूर्य की सतह पर एक विशालकाय होल दिखा है। इस होल का आकार पृथ्वी से 20 गुना बड़ा है। इस होल को कोरोनल होल कहा जाता है। इस होल के दिखने के बाद सूर्य की सतह पर अंधेरा छा गया है। सूर्य में इस विशालकाय होल को देखते हुए एनओएए ने भू चुंबकीय तूफानों की चेतावनी दी है। बता दें कि एनओएए एक अमेरिकी फेडरल एजेंसी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सूर्य की सतह पर गड्ढे के बाद 29 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं पृथ्वी की तरफ बढ़ रही है। शुक्रवार को इसे पृथ्वी से टकराने की आशंका है। इसके पृथ्वी से टकराने के बाद इसका क्या प्रभाव होगा, इस पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
सूर्य से निकलने वाले कण उपग्रहों, मोबाइल फोन और जीपीएस को प्रभावित कर सकता है। बता दें कि नासा के एसडीओ ने 23 मार्च को सूर्य के साउथ पोल के नजदीक कोरोनल होल की खोज की थी। ये छेद सौर हवा को अंतरिक्ष में अधिक आसानी से फैला पाते हैं। इसकी रेटिंग जी1 से जी5 तक होती है।
नासा के वैज्ञानिक एलेक्स यंग के मुताबिक, मौजूदा कोरोनल होल बहुत बड़ा है। इसकी लंबाई तीन लाख और चौड़ाई चार लाख किलोमीटर है। इसमें बैक टू बैक 20-30 पृथ्वी समा सकती है। नासा के मुताबिक, सूर्य की सतह पर ब्लैक कलर के होल को कोरोनल होल कहा जाता है।
ये ब्लैक इसलिए दिखते हैं क्योंकि वे आसपास के प्लाज्मा की तुलना में ठंडे, कम घने क्षेत्र हैं और खुले एकध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र के क्षेत्र हैं। ये छेद सूर्य पर किसी भी समय और स्थान पर विकसित हो सकते हैं।