टीम एबीएन, रांची। गुरुवार को ज्योतिर्विज्ञान विभाग में खगोल शास्त्र का ज्योतिषीय अध्ययन विषय पर एकदिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याख्याता डॉ गोपाल पाठक कर खेडकर थे। उन्होंने बताया कि खगोल शास्त्र एवं ज्योतिष शास्त्र दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं। भारतवर्ष के प्राचीन ज्योतिर्विद् विद्वानों ने खगोल शास्त्र पर अनेक कार्य किए हैं। इनमें भास्कराचार्य, आर्यभट्ट, बापू देव शास्त्री, कमलाकर भट्ट, महर्षि लगध आदि प्रमुख हैं। हजारों वर्ष पहले आकाश मंडल में होने वाली घटनाओं से पड़ने वाले प्रभावों का खोज किये हैं। वैदिक गणित से काल को जान सकते हैं। विभाग के को-आॅर्डिनेटर डॉ प्रकाश सिंह ने कहा कि आने वाले समय में वैदिक गणित को जानना आवश्यक होगा। इसके अलावा विभाग के शिक्षक डॉ धीरेंद्र दुबे, निदेशक प्रोफेसर अर्चना कुमारी दुबे, डॉ मधुलिका वर्मा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ एस के घोषाल व धन्यवाद ज्ञापन डॉ चंद्रशेखर मिश्र ने किया।