एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) परिचालन संबंधी गतिविधियां अपनी मार्केटिंग शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) से करवाएगा। वहीं, खुद अंतरिक्ष तकनीकों के शोध और विकास पर जोर देगा। इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने सोमवार को रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में यह खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में इसरो का जोर सरकार व जनता के लिए उपकरण जारी करने पर रहा है। उसने उपग्रह प्रणालियां बनायी, विभिन्न उपग्रहों निर्माण, प्रक्षेपण और संचालन करवाये, संचार व्यवस्था मुहैया करवाई, पृथ्वी के पर्यवेक्षण और नेविगेशन की सुविधाएं दीं। अब केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार यह सभी काम एनएसआईएल के सुपुर्द किए जा रहे हैं। इसके बदले आने वाले वर्षों में इसरो का ध्यान ज्यादा से ज्यादा शोध और विकास पर रहेगा। इनमें अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित आधुनिक तकनीकें प्राथमिकता पर होंगी। डॉ सोमनाथ ने दावा किया, इसरो को लेकर सरकार द्वारा करवाए जा रहे यह बदलाव कई वैज्ञानिकों संस्थानों के साथ इसरो शोध और समन्वय गतिविधियों को पूरी तरह बदल देंगे।
कार्यक्रम में आरआरआई के निदेशक प्रो तरुण सौरदीप ने बताया कि यह इंस्टीट्यूट 1948 में नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सर सीवी रमन ने स्थापित किया था। यह 75 वर्षों से भौतिकी के प्रमुख क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा दे रहा है।