एबीएन नॉलेज डेस्क। खबरें आई थीं और काफी चर्चा भी हुई थी कि मंगल पर जीवन की संभावना है, लेकिन अब बताया जा रहा है कि मंगल पर जीवन नहीं रहा है। पहले जब भी पृथ्वी के बाहर जीवन की कल्पना की जाती थी तो मंगल की बात होती थी। वैज्ञानिकों को मंगल पर जीवन को लेकर कई ठोस प्रमाण भी मिले थे। हालांकि, अब ये उम्मीद खत्म होती जा रही है या फिर लगभग खत्म हो गई है। अब कई रिसर्च रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जिनमें मंगल पर जीवन ना होने का दावा किया जाता है। मंगल पर जीवन ना होने की रिपोर्ट्स के बाद अब लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वो रहस्य क्या है कि मंगल पर जीवन खत्म हो गया। अब इसे लेकर कई रिसर्च की जा रही है, जिसमें मंगल पर जीवन शुरू होने से खत्म होने का कारण पता किया जा रहा है, तो आज हम आपको बताते हैं कि आखिर ऐसे क्या हुआ कि मंगल पर जीवन की शुरुआत अच्छे से नहीं हो पाई। तो जानते हैं मंगल पर जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें…
क्यों मंगल पर नहीं पनपा जीवन : आपको ये जानकार हैरानी होगी कि जिस जलवायु परिवर्तन की बात पृथ्वी पर की जा रही है, उसी जलवायु परिवर्तन के चलते मंगल पर जीवन संभव नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से ही मंगल का वातावरण प्रभावित हुआ है और इस वजह से आज मंगल की जमीन लंबे समय तक बंजर ही रह गई है। रिसर्च में सामने आया है कि ग्रीन हाउस गैस इफेक्ट की वजह से यह असर हुआ है। एक अमेरिकन वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 3.7 से 4.1 अरब साल पहले मंगल के शुरुआती दिनों का वातावरण, जीवन को पनपने देने के लिए अनुकूल था। हाइड्रोजन पर जीवित रहने वाले और मीथेन का उत्सर्जन करने वाले सामान्य रोगाणु मंगल पर करीब 370 करोड़ साल पहले पनपे होंगे। इस तरह के रोगाणु आज पृथ्वी पर आम हैं, लेकिन ये मंगल के साथ उल्टे साबित हुए। लेकिन माना जा रहा है कि मंगल की स्थिति में हो सकता है कि ज्यादा मीथेन का उत्सर्जन हुआ हो। नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने कहा कि इस तरह की घटना ने संभावित गर्म परिस्थितियों को समाप्त कर दिया होगा और मंगल की सतह पर जीवित रहने की क्षमता कम हो गई होगी। बता दें कि इसका पता लगाने के लिए एरिजोना यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मंगल ग्रह से कुछ साक्ष्य जुटाकर उन्हें वातावरण और जलवायु के मॉडल के साथ-साथ मीथेन उत्पादक रोगाणुओं के पारिस्थितिक मॉडल का उपयोग करके काल्पनिक मॉडल बनाया।
इसमें यह भी पाया गया कि शुरुआत में मगल आज की ठंड वाली परिस्थितियों की तुलना में काफी गर्म था और उस वक्त वहां हाइड्रोजन काफी मात्रा में थी। इस स्थिति में रोगाणुओं को पर्याप्त भोजन आपूर्ति मिली होगी लेकिन, वातावरण के बदलने के साथ ही यहां की स्थिति भी बदल गयी।