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चीते के पास 32 का खतियान और आरक्षण नहीं था, इसलिए लुप्‍त हो गया...

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चीते के पास 32 का खतियान और आरक्षण नहीं था, इसलिए लुप्‍त हो गया...
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एबीएन एडिटोरियल डेस्क (मनोज शर्मा)। बिल्‍ली प्रजाति के सभी जानवरों को जूलॉजिकली "फेलिस" या "पैंथेरा" कहते हैं। जैसे घरेलु बिल्‍ली को ल फेलिस डोमेस्टिकस, बाघ को पैंथेरा टाइग्रिस, तेंदूए को पैंथेरा पारडस, सिंह को पैंथेरा लियो, जगुआर को पैंथेरा ओंका। लेकिन चीता बेचारा विडालवंशी होते हुये भी जूलॉजिकल नाम के मामले में भी अलग थलग पड़ गया चीते को एसाइनोनिक्‍स जुबेटस कहा जाता है इसके नाम में न फेलिस है न पैंथेरा।ये आरक्षण से वंचित रहा। इनकी एक और रेयर किस्‍म की प्रजाति भी है जो गोल चित्ती के बजाय चौकोर गाढे, स्‍टाइलिश चित्‍ती वाली भी होती है ,पर इसे बहुत कम लोग जानते हैं ये खतियानी नहीं हो पाये। जहांगीर ने अपने किताब में नीली चित्‍तीदार चीते का भी उल्‍लेख किया है वो नस्‍ल होता तो आज परग्रही श्रेणी में आता? उसे भारतीय भी नहीं माना जाता। चीते के पास न 32 का खतियान था न कोई आरक्षण। इस पर आरोप लगा कि ये सबसे तेज दौड़ता है इसलिये इसे खतियान और आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इस कारण से इसका शिकार लकड़बग्‍घे, शेर, जंगली कुत्‍ते और तो और गिद्ध ,सियार भी छीन लेते हैं। क्‍योंकि तेज दौड़ कर किसी को भी यह मार गिराता है, पर हांफ कर थक जाता है। अब उन नासपीटे राजा महाराजाओं को भी गरियाना चाहिये जिन्‍होंने निरीह शेर, चीते, बाघ को अपने लाव लश्‍कर समेत घेर कर बंदूक से मार मार कर खत्‍म कर दिया। इनके शवों के साथ फोटो खिंचवा कर महल के दीवारों पर तो ऐसे टांगे जैसे अकेले निहत्‍थे इन जानवरों को कुश्‍ती लड़ कर मार गिराये हों? अगर अकेले खाली हाथ इन शेर चीतों बाघों यहां तक कि सियारों से भी निबटते तो ढेरे राजा महाराजा लोगों की तस्‍वीरें दिवंगत होकर दीवार पर टंग जाती इस कैप्‍शन के साथ कि .... फलां जगल में गीदड़ से लड़ते हुये आदमचिल्‍ली बना कर फलां सियारों का निवाला बने। एक फोटू आजकल टीवी में देखते हैं कि फलां राजा ने भारत के आखिरी तीन चीतों का शिकार किया उसके बाद भारतमें चीते विलुप्‍त हो गये। राजा महाराजा भी विलुप्‍त हो गये पर मोदी जी के लिये एक एतिहासिक मौका भी बना गये। आज मोदी जी इन गैर खतियानी गैर आरक्षित चीतों को भारत में अफ्रिका से लाकर पुनर्वास करा रहे हैं। मैं बतौर एक संरक्षणवादी और प्रकृति प्रेमी मोदी जी के इस कदम से प्रसन्‍न हूं। मैं समझता था कि पीएम को कूटनीति, देश के विकास, देशी विदेशी शत्रुओं से निबटने में ही इतना ऊर्जा लगता होगा कि जंगल, प्रकृति, जीव जंतुओं, पर्यावरण के ऊपर उनका ध्‍यान कहां जाता होगा? पर मैं गलत था। अब विपक्ष और विरोधियों को वो राग अलापना शुरू करना चाहिये कि देश महंगाई, बेरोजगारी से परेशान है और ये अफ्रिका से तेज सबसे तेज दौड़ने वाला खादु चीता लाकर इवेंट करवा रहे हैं।
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