एबीएन डेस्क (के विश्वा)। लोकतंत्र में बहुसंख्यक जिस को वोट देता है वह पार्टी सरकार बनाती है। पर सरकार की राजनीतिक धर्म है कि सरकार जाति, धर्म, भाषा और संस्कृति के आधार पर जो भी अल्पसंख्यक हैं, उनके सम्मान स्वाभिमान और सुरक्षा की गारंटी दे। पर इस राज्य में सरकार की विभाजन कारी नीतियों का परिणाम है कि भोजपुरी मगही और अंगिका बोलने वाले लोगों को राज्य में दोयम दर्जे का नागरिक बनाया जा रहा है। साथ ही उन्हें नफरत का सामना करना पड़ रहा है। उनके साथ भेदभाव बढ़ रहा है और इससे नफरत की खाई और बढ़ेगी। राज्य में संघर्ष पैदा होगा, जिससे राज्य की एकता और अखंडता को खतरा है। हम बहुत जिम्मेदारी के साथ यह कहते हैं कि यह षड्यंत्र झारखंड सरकार की है। सरकार राज्य के अहम मुद्दे जैसे बेरोजगारी भत्ता, जेपीएससी की धांधली, जेएसएससी की बहाली, सहायक पुलिस कर्मियों की मांग, आंगनबाड़ी सेविकाओं की मांग सहित अन्य सभी जरूरी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए राज्य के युवाओं को आपस में लड़ा रही है। जिसे हमें नाकाम करना है। लोगों को जागरूक करने के लिए हम यह प्रेस वार्ता कर रहे हैं।
राज्य का निर्माण भाषा के आधार पर नहीं हुआ। राज्य के पलामू प्रमंडल की क्षेत्रीय भाषा हिंदी और भोजपुरी है। ऐसे में हमें हमारे ही राज्य में हमारे भाषा, संस्कृति को कोई बाहरी कहेगा तो यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम चाहते हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यह स्पष्ट करें कि पलामू प्रमंडल झारखंड का हिस्सा है या नहीं है। अगर नहीं है तो उनकी मर्जी वह पलामू को अलग कर दें और अगर पलामू प्रमंडल झारखंड की हिस्सा है तो पलामू में कौन लोग रहते हैं जिंदा या मुर्दा। उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि पलामू सिर्फ भूखंड नहीं है । पलामू में भी जिंदा लोग रहते हैं। और जहां लोग रहते हैं उनकी भी अपनी भाषा और संस्कृति होती है जिसकी रक्षा सरकार को करनी होती है।
हमारे पास भी निलांबर-पितांबर की धरोहर है। हमारा भी स्वाभिमान है। अगर राज्य को सचमुच आगे बढ़ाना चाहते हैं तो सरकार को 24 जिलों की बात करनी होगी। और भाषा के नाम पर इस उन्माद को बंद करना होगा। अन्यथा क्रिया की प्रतिक्रिया और प्रतिकार के लिए सरकार को तैयार रहना चाहिए। राज्य की जनता से अनुरोध करेंगे कि हमारी साझी लड़ाई है, साझी संस्कृति और भौगोलिक विरासत है। हमें सबके भाषा संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा और उसका सम्मान करना चाहिए। हमें आपस में लड़ाने वाले अंग्रेजों से सावधान रहना चाहिए। जनता को जरूरी मुद्दों पर एक साथ सरकार को घेरना चाहिए। सरकार से सवाल करना चाहिए।
सरकार की इस प्रायोजित आंदोलन को हम गैर झारखंडी और विभाजन कारी मानते हैं? क्योंकि यह आंदोलन पूरे राज्य के हितों की बात नहीं करता। इसलिए सरकार की इस नीति का हम विरोध करते हैं और राज्य के सभी भाषा, जाति, धर्म के अल्पसंख्यकों के साथ खड़े हैं। उनके हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। गैर संवैधानिक नीतियों का मुंहतोड़ जवाब देंगे और सरकार को जरूरी मुद्दों पर बात करने को मजबूर करेंगे।