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सबके हित में हैं शैक्षणिक संस्थाओं की गरिमा...

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सबके हित में हैं शैक्षणिक संस्थाओं की गरिमा...
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एबीएन एडिटोरियल डेस्क (मृत्युंजय दीक्षित)। अगर कटटरपंथियों के दबाव में आकर उनकी यह मांग एक मान ली गयी तो उनकी डिमांड और बढ़ती जायेगी। विद्यालयों में बच्चों के बीच समानता बढ़ाने के लिए यूनिफार्म का प्रावधान किया गया है। कुछ तत्व इस बात को अनदेखा कर इस्लाम के नाम पर हंगामा कर रहे हैं। कर्नाटक में उडुप्पी के एक छोटे से स्कूल से प्रारम्भ हुआ हिजाब विवाद अब एक बड़ा और विकराल रूप ले चुका है। देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन करके विवाद को और गहरा करने का प्रयास किया जा रहा है। जब विश्व के कई देशों ने मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है, तब भारत में इस्लामिक कटटरपंथियों द्वारा हिजाब आंदोलन खड़ा कर देना एक राजनैतिक साजिश लग रही है जो प्रथम दृष्टया विपक्षी दलों का काम लग रहा है किन्तु इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। अब कर्नाटक के स्कूल की छह लड़कियों के पीछे के कट्टरपंथियों ने कमान संभल ली है। कर्नाटक से लेकर हैदराबाद और जयपुर तक तथा दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर बंगाल के मुर्शिदाबाद तक और उप्र के अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय तक सभी जगह हिजाब समर्थक गोलबंद होकर सड़कों पर निकल आये हैं। यह प्रदर्शन तब हो रहे हैं जबकि कर्नाटक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी मामले की सुनवाई चल रही है। जिस तरह सेक्युलर दलों ने हिजाब विवाद को लपका तथा आग में घी डाल कर भड़काने का काम किया वो आश्चर्यचकित करने वाला है, कर्नाटक से लेकर महाराष्ट्र के मालेगांव तक इनकी भूमिका आग लगा दो, रोटी सेक लो वाली दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र में एआईएएम, शरद पवार की एनसीपी ने तो मुस्लिम समाज की महिलाओें व कटटरपंथियों को भड़काकर हिजाब डे तक बना डाला है। एआईएएम नेता ओवैसी यहां तक बौखला गये हैं कि वह कह रहे हैं कि जब तक हिजाब नहीं तब तक किताब नहीं, वह यह भी कह रहे हैं कि एक दिन एक हिजाबी देश की प्रधानमंत्री भी बनेगी। यह पूरा का पूरा घटनाक्रम एक बहुत बडी साजिश है जिसे तथाकथित सेकुलर राजनैतिक दल अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने के लिए अंजाम दे रहे हैं। यही कारण है कि विपक्ष हिजाब विवाद की आड़ में मोदी सरकार, भाजपा व संघ के खिलाफ नये सिरे से नफरत फैला रहा और मुसलमानों का तुष्टिकरण करने के लिए खूब बयानबाजी कर रहा है। हिजाब विवाद को राजनैतिक रंग देने और नफरत की आग को भड़काने के लिए सोशल मीडिया का भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो जारी किये गये हैं जिसमें जिसमें कुछ मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनकर क्रिकेट खेल रही हैं और कहीं फुटबाल और हॉकी खेल रहीं हैं। एक मुस्लिम महिला चिकित्सक का वीडियो आया जो हिजाब पहनकर हास्पिटल जा रही है और मरीजों को देख रही है। बिना हेलमेट राइडिंग करती और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर भद्दे इशारे करती बुर्कानशीनों के वीडियो भी आ रहे हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मत है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में बहुत सी मुस्लिम महिलाएं व युवतियां जो तीन तलाक कानून से बहुत खुश हैं तथा जिन गरीब मुस्लिम महिलाओं को उज्ज्वला योजना का लाभ मिला है, फ्री राशन मिला है आवास मिला है और सुरक्षा मिली है वे बीजेपी को वोट देने जा रही थीं अत: ऐसे में वातावारण को खराब कर उन महिलाओं को वोट देने से रोकने के लिए यह आंदोलन खड़ा किया गया है। अगर कट्टरपंथियों के दबाव में आकर उनकी यह मांग एक मान ली गयी तो उनकी डिमांड और बढ़ती जायेगी। विद्यालयों में बच्चों के बीच समानता बढ़ाने के लिए यूनिफार्म का प्रावधान किया गया है। कुछ तत्व इस बात को अनदेखा कर इस्लाम के नाम पर हंगामा कर रहे हैं। क्या इन लोगों को पता नहीं है कि भारतीय संविधान के अनुसार प्राथमिक शिक्षा सबके लिए अनिवार्य है। इस अनिवार्यता के बावजूद आज भी देशकी 66 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं निरक्षर हैं। इसी मजहबी कट्टरता ने मुस्लिम महिलाओं की साक्षरता दर को इतना नीचे रखा। बेटियों को घरों से निकलने नहीं दिया जाता। दूसरा उन पर बुर्के को लाद दिया जाता था। बेटियों को सिर से पांव तक बेडियों की तरह जकड़ दिया गया। आज केंद्र सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत शिक्षा के लिए विशेष प्रारंभ किये हैं जिसके सुखद परिणाम प्राप्त हो रहे थे लेकिन मुस्लिम समाज के कुछ ठेकेदारों और उनके हमराह राजनैतिक दलों को यह बात पसंद नहीं आ रही है। उडुप्पी जिले का एक हिजाब विवाद आज पत्थरबाजी व हिंसक प्रदर्शनों में बदल गया है। दिल्ली के शाहीन बाग में नारा-ए-तकदीर व अल्लाह हू अकबर के नारे गूंज रहे हैं। बुर्कानशीं मुस्लिम लड़की कटटरपंथियों की पोस्टर गर्ल बन बन चुकी है। पाकिस्तान, तुर्की से उसे बधाई मिल रही है और तो और मलाला जैसे लोग उसके समर्थन में ट्वीट कर रहे हैं। इस बवाल से देश में जिहाद, अलगाववाद व इस्लामिक कट्टरता की फैक्टरी कहलायी जाने वाली संस्था एसडीपीआई, पीएफआई की संलिप्तता जगजाहिर हो गई है। हिजाब की आड़ में भारत में दंगे की आग को भड़काने की साजिश भी बेनकाब हो चुकी है। इस आग को भड़काने में पाक खुफिया एंजेसी आईएसआई व सिख फार जस्टिस जैसे संगठनों की भूमिका सामने आ रही है।कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवप्रसाद व कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भडकाऊ ट्वीट किये। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने देशमें गृहयुद्ध छिडने की बात कह दी। कांग्रेस सहित सभी दल एक बार फिर तुष्टिकरण के चलते नीचता पर उतर आये हैं। उप्र में एक सपा नेता ने हिजाब पर विवादित बयान दिया कि हिजाब पर हाथ डालने वालों का हाथ काट देंगे, आखिर यह लोग चाहते क्या हैं। स्पष्ट है कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दल एसडीपीआई, पीएफआई तथा आईएसआई व सिख फार जस्टिस जैसे संगठनों का सहारा लेकर चुनाव में है।
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