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विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा देश...

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विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा देश...
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एबीएन एडिटोरियल डेस्क (देबंजना चौधरी)। पावर फॉर आॅल 2022 एनर्जी एक्सेस ट्रेंड एक इंडिकेटर है जो आने वाली चीजों का संकेत दे रहा है, जब भारत ने 2022 का केंद्रीय बजट पेश किया। बजट का आवंटन कई ट्रेंड्स के साथ जुड़ता है और यह इक्विटी-आधारित अक्षय ऊर्जा रणनीति और वित्तपोषण पर आधारित होता है। भारत ने इस साल जब अपना केंद्रीय बजट पेश किया, तो इसने स्वच्छ ऊर्जा उपक्रमों और उनके दायरे के लिए आशा जगायी है। सीओपी 26 (कॉप 26) में भारत ने कोयले और अन्य जीवाश्म के संदर्भ में फेजिंग आउट के बजाय फेजिंग डाउन की घोषणा की। यानी कोयले या जीवाश्म का इस्तेमाल कम करने की तरफ इशारा किया। अक्षय ऊर्जा जैसे समाधान सरकार की योजनाओं, नीतियों और रणनीतियों में मुख्य रूप से होने की भी उम्मीद है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कम से कम अगले दो दशकों के लिए स्वच्छ ऊर्जा मुख्य एजेंडा होगा। इधर एनर्जी एक्सेस ट्रेंड्स 2022 की रिपोर्ट भी भारत के लिए उसी की ओर इशारा करती है। इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर सेल से लेकर हाइड्रोजन प्लांट में बड़े निवेश तक में राजनीतिक मंशा यह है कि जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता से स्थायी समाधान की ओर बढ़ा जाए। यह बहुत जरूरी है कि हरित ऊर्जा उत्पादन को तत्काल बढ़ावा दिया जाए, केवल स्थांतरण के लिए रणनीति बने और यह सुनिश्चत किया जाए कि हरित क्षेत्र में ऐसे समुदायों के लिए भी नौकरियां हो, जिनतक आम तौर पर सुविधाएं नहीं पहुंच पाती हैं और जो वंचित हैं। 2022 के एनर्जी एक्सेस ट्रेंड उसी इसी दिशा को दर्शा रहे हैं, जिस तरफ दुनिया जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दूर करने के लिए बढ़ रही है। महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की कमी की वजह से अक्षय क्षेत्र में महिलाओं के सामने आ रही सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां कैसे बढ़ जाती हैं, यह भी देखा जा रहा है। महिलाओं की इन चुनौतियों को ध्यान में रख कर सरकारी नीति और योजनाओं को बनाने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण महिलाएं और लड़कियां असमान रूप से प्रभावित हैं और उन्हें अभी भी समान अवसर नहीं मिल सका है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। ऐसा इसलिए है कि दुनिया के अधिकांश गरीबों में महिलाएं ज्यादा है और अपनी आजीविका के लिए उन प्राकृतिक संसाधनों पर ज्यादा निर्भर हैं, जो जलवायु परिवर्तन के कारण खतरे में हैं। विकासशील देशों में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं और पुरुष विशेष रूप से उस समय कमजोर होते हैं, जब वे अपनी आजीविका के लिए स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक निर्भर होते हैं। उनके उपर चूल्हे पर खाना पकाने के लिए पानी, भोजन और संसाधनों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी होती है। इस दौरान ने सबसे अधिक चुनौतियों का सामना करते हैं। 2022 में डीआरई के क्षेत्र में लैंगिक समानता के मामले में कुछ बेहतर होने की उम्मीद है, लेकिन यह उतना नहीं है, जितना होना चाहिए। डीआरई के अनुकूल नीतियों ने ऐसे फंडिंग तक का रास्ता दिखा दिया है, जो महिलाओं की उद्यमशीलता कौशल को शामिल करता है। भले ही उडश्कऊ-19 का यह प्रकोप जारी रहे और 2022 में लॉकडाउन डीआरई क्षेत्र को धीमा कर दे, लेकिन डीआरई ने इतिहास में काफी लचीलापन दिखाया है। भारत के निर्माण में बेहतर सफर और आत्मानिर्भर भारत की राह में ऊर्जा उद्यमियों और एमएसएमई की प्रमुख भूमिका होगी। यह रिपोर्ट कई देशों के साथ अपने डीआरई रोडमैप को व्यवस्थित करने के एक सिल्वर लाइनिंग को भी प्रकाश में लाती है। एशिया-पेसिफिक देश विशेष रूप से डीआरई कथा को आगे बढ़ाते हैं और अब वे ऊर्जा स्थांतरण निवेश स्तर पर विश्व के शीर्ष 10 देशों में से चार चार स्थानों पर कायम हैं। इस सूची में भारत और दक्षिण कोरिया चीन और जापान के साथ शामिल हो गए हैं। ब्लूमबर्ग एनईएफ की एक रिपोर्ट से पता चला है कि 2021 में ऊर्जा स्थांतरण में वैश्विक निवेश 755 बिलियन डॉलर था। यह बढ़ते जलवायु लक्ष्यों और योजनाओं पर काम कर रहे देशों के लिए और खास कर एशिया-पेसिफिक देशों के लिए नया रिकॉर्ड था। रिपोर्ट के अनुसार विश्व स्तर पर पूर्वी अफ्रीका और एशिया बाहर हैं। यह दिलचस्प है कि ट्रेंड्स सर्वे के जवाब देने वालों का अनुमान है कि भारत की अगली क्रांति बाइक और ई-रिख्शा जैसे दो और तीन पहिया वाहनों के उपयोग के क्षेत्र में होगी। ई-मोबिलिटी ट्रेंड डीआरई क्षेत्र की क्षमता को प्रदर्शित करता है और बताता है कि यह कैसे कमजोर समुदायों को जोड़कर उनकी आजीविका और मुख्य धारा से उनके जुड़ाव को बेहतर कर रहा है। आज जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी संघर्ष कर रही है, भारत में स्वच्छ ऊर्जा मोड उद्यमियों और समुदायों दोनों के लिए समान रूप से जीवन का एक नया आयाम प्रदान कर रहा है। (अनुसंधान से पता चलता है कि अभी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है, लेकिन यह भी बताता है कि तेज गति से विकास निश्चित है)। सरकार समर्थित योजनाओं के कारण भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ रहा है। इस वर्ष और भी अधिक राज्यों में सार्वजनिक परिवहन व्यव्सथाओं और असंगठित परिवहन क्षेत्रों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के होने की संभावना है। प्रोडक्टिव यूज आॅफ रेनेवेबल एनर्जी 2022 में भी चलन में होगा। यह खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण और स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम बनाने में गेम-चेंजर साबित होगा। कृषि और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में कोल्ड चेन प्रभावी रहेगा। अभी भी जब महामारी लगातार तीसरे वर्ष फैल रही है, ऐसे में एसडीजी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के साथ समान रूप से टीकाकरण देश की प्राथमिकता होगी। जब देश के कई राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे डीआरई को घोषणापत्रों में शामिल किया जाता है और यह सुशासन के लिए एक बेंचमार्क बन जाता है। एसएमई गवाह बनेगी कि विकास और योजनाएं ही ग्रामीण के साथ शहरी आबादी को आॅफ-ग्रिड नवीकरणीय समाधान प्रदान कराने में सक्षम होगी। बेहतर राजकोषीय नीतियां, कम सीमा शुल्क, और वास्तविक विकास से जुड़ी हुई राजनीतिक मंशा से लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को उम्मीद है कि न केवल बजट में बल्कि राज्य-विशिष्ट योजनाओं और नीतियों में भी टैक्स से राहत मिलेगा ताकी हरित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन मिल सके। ट्रेंड्स की रिपोर्ट बताती है कि वित्त मंत्री के बजट का बड़ा हिस्सा अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा क्षमता, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन बॉन्ड के लिए आवंटित है। बजट में आवंटित किए गए ग्रीन बॉन्ड से मिलने वाली धनराशि का उपयोग उन परियोजनाओं पर किए जाने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता को कम करने में मदद करेगी। ट्रेंड्स की रिपोर्ट कहता है कि घरेलू विनिर्माण करना भारत के लिए चर्चा का विषय होगा। हालांकि भारत देश के अंदर ह्यफेजिंग आउटह्ण के नैरेटिव को अच्छी तरह जोड़ सकता है, लेकिन इस साल डीआरई क्षेत्र के बढ़ने की उम्मीद है। रिन्युएबल क्षेत्र भारत के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रमुख बिल्डिंग ब्लॉक्स में से एक है और इज आॅफ डुइंग बिजनेस प्रभावी होगा। जरूरी है कि भारत की ऊर्जा स्थांतरण की कहानी को चार्ट करने के लिए एक नई गति बनायी जाए। भारत में यह सब होते हुए पूरा विश्व करीब से देखेगा। (लेखिका इंडिया पावर फॉर आॅल की कंट्री डायरेक्टर हैं।)
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