Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
विचार

नि:स्वार्थ प्रेम और बदलती मानसिकता

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
नि:स्वार्थ प्रेम और बदलती मानसिकता
विज्ञापन
एबीएन एडिटोरियल डेस्क (सिंधु मिश्रा)। हम सब अपनी मयार्दाएं जानते हैं, हर रिश्ते की अपनी एक मर्यादा होती है और इन मयार्दाओं में रहते हुए रिश्ते निभाने के तरीके अलग अलग होते हैं, जो हमारे संस्कारों और तौर तरीकों पर निर्भर करता है। चंद रिश्तों की मिसाल यहां आपको देना चाहूंगी, सास-बहू, ससुर-दामाद, बेटा-बेटी, बेटी-बहू, ननद-भाभी, जेठानी-देवरानी, कुछ चुनिंदा रिश्तों की ही बात की है मैंने। क्या हम इन रिश्तों में आज नि:स्वार्थ प्रेम देख सकते हैं? शायद हां और ना। दोनों ही जवाब आपके पास होंगे। जरा देखें अपने आसपास, नि:स्वार्थ प्रेम पर टिके उन रिश्तों को। क्या सचमुच नि:स्वार्थ प्रेम दिखाई देता है? इनके बीच क्या ईर्ष्या, द्वेष, जैसी भावनाएं नहीं नजर आती हैं? अमूमन इन रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर भी गंभीर हालात बन जाते हैं। आरोप-प्रत्यारोप की कड़ियां तैयार होने लगती हैं और ऐसे रिश्ते सिर्फ नाम के रिश्ते रह जाते हैं। अक्सर उन रिश्तों में दरारें आ जाती हैं, जिसने रिश्तों की मर्यादाएं न समझी। न ही उस अनुसार आचरण किया, दोष हमेशा हम नए रिश्तों और हमारी आज की पीढ़ी को देते हैं, पर ऐसा नहीं है आज की पीढ़ी पर दोषारोपण करने के पूर्व हम अपने संस्कारों और अपने विचारों को भी सुसंस्कृत करें और देखें आखिर कहाँ हमसे चूक हो रही है? क्यों हमारा प्रेम नि:स्वार्थ होने की जगह स्वार्थीपन की ओर हमें लिए जा रहा है? आखिर क्यों बिखर जाते हैं ये रिश्ते?क्यों हम एकाकी जीवन जीने की ओर अग्रसर होते हैं? आत्ममंथन आज की जरूरत बनती जा रही है, मां-बाप, बड़े बुजुर्ग और तमाम वो रिश्ते जिनमें बिखराव आ रहे हैं। सभी अपने स्वार्थ की नहीं बल्कि रिश्तों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करने की कृपा करें, आपसी तालमेल और नि:स्वार्थ प्रेम को जीवन में स्थान दें और मानसिकता को स्वस्थ रखें, तभी हम सफलता की उन मापदंडों को पूरा करते हुए खुशहाल जीवन जी सकेंगे। धन्यवाद! (लेखिका दहेजमुक्त झारखंड की राष्ट्रीय महासचिव हैं।)
विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 35,065