त्रिवेणी दास
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (फरर) के प्रमुख सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि रिजीम चेंज से समाज की परिस्थितियां न तो कभी बदली है और न ही कभी बदली जा सकती है, जबकि यथार्थ यह है कि समाज की परिस्थिति समाज के प्रयास से ही बदलती है।
शिवसेना के उद्धव गुट के नेता (प्रवक्ता संजय राउत, जो अपने उटपटांग बयान के लिए प्रसिद्ध हैं) ने दावा किया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के वियतनाम से लौट के बाद भारत में तख्तापलट होगा। दुनिया के देशों में हाल में हो रहे घटना क्रम से भारत की जनता का चिंतित होना स्वाभाविक ही है।
विजयादशमी के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस समय जो शक्तियां भारत को अस्थिर करने में लगी हुई हैं उनके तीन मुख्य हेतु हैं। सत्ता में आने पर लूट, समाज में फूट और भारतीय संस्कृति से घृणा। इस प्रकार के लोगों का सभी आरोप निराधार होते हैं।
कभी एलआईसी को गड़बड़ बतायेंगे, कभी वैक्सीन को, जहां-जहां से चुनाव हार जायेंगे वहां ईवीएम मशीन को और मतदाता सूची के शुद्धिकरण में चुनाव आयोग को पक्षपात करते हुए बतायेंगे।
भारतीय समाज का तानाबाना नेपाल और बांग्लादेश से पूर्णत: भिन्न है। तख्ता पलट जैसे किसी भी क्रिया को भारतीय जनमानस ने आजादी के बाद से न तो कभी स्वीकार किया है और ना कभी आगे स्वीकार करेगा।