त्रिवेणी दास
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। देश में इं.डि.या. गठबंधन और कॉकरोच पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने या उन्हें त्यागपत्र देने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में सड़कों पर आंदोलन चला रहा है। मुख्य चुनाव की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। देश का प्रधानमंत्री, सदन में विपक्ष का नेता या विपक्ष के सबसे बड़े दल का नेता और प्रधानमंत्री के द्वारा नियुक्त कोई एक कैबिनेट मंत्री के द्वारा सामूहिक निर्णय से मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए राष्ट्रपति के पास सुझाव प्रस्तुत किया जाता है उसके आधार पर राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त या मुख्य न्यायाधीश को सड़क में आंदोलन करके नहीं हटाया जा सकता है, इसके लिए पार्लियामेंट में महाभियोग का प्रस्ताव लाना पड़ता है। महाभियोग एक ऐसी संवैधानिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी देश के उच्च पद पर बैठे सार्वजनिक अधिकारी (जैसे राष्ट्रपति, न्यायाधीश आदि) पर कदाचार, संविधान के उल्लंघन या गंभीर अपराधों के आरोप लगाए जाते हैं और उन्हें पद से हटाया जाता है।
भारत में महाभियोग चलाने की प्रक्रिया भारत का संविधान के अनुच्छेद 61 में दी गयी है। लोकसभा में और राज्यसभा में प्रस्ताव लाने के लिए सांसदों की संख्या निर्धारित होती है जो लगभग एक चौथाई के बराबर है।
बिल पास करने के लिए टू थर्ड 2/3 मेजॉरिटी आवश्यक है। महाभियोग लाने के लिए लोकसभा में 100 सांसदों की हस्ताक्षर चाहिए और राज्यसभा में 50 सांसदों कम से कम का हस्ताक्षर चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने पर विचार कर ही नहीं सकती है।
संसद के दोनों सदनों से महाभियोग का बिल पास होने पर राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से रिमूव कर सकते हैं। दुनिया भर में फैला एक इको सिस्टम है, जो भारत को डिस्टर्ब करके रखना चाहता है। भारत की तरक्की, आर्थिक उन्नति, आत्मनिर्भरता दुनिया भर में प्राप्त हो रहे प्रतिष्ठा इत्यादि को वे विखंडित करने का प्रयास करते रहते हैं।
ध्रुव राठी एक यूट्यूबर है। हरियाणा में जन्म लिया और अभी जर्मनी के बर्लिन में रहता है। सोशल मीडिया के माध्यम से भारत के खिलाफ झूठी खबरें फैलाता रहता है। इस प्रकार के अनेक लोग विदेश में बैठकर भारत के खिलाफ षड्यंत्र करते रहते हैं। उनके इकोसिस्टम में भारत के भी कुछ लोग स्वार्थवश शामिल हो जाते हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के राहुल गांधी ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का उनके आंदोलन का कोई समय सीमा नहीं है, वर्षों तक चलाया जा सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध संसद में महाभियोग कब लाता है और लाता भी है कि नहीं?