रोम जल रहा था और नीरो बंशी बजा रहा था...
त्रिवेणी दास
रोम जल रहा था
नीरो बंसी बजा रहा था
बयानवीर का अपना
घर जल रहा था
दूसरे के घर में अंजलि से
पानी डाल रहा था
सवाल है कि दिल्ली के जंतर मंतर के आंदोलनकारी छात्र अगर छात्र थे, तो झारखंड के रांची में आंदोलनकारी छात्र दूसरे ग्रह आये बाह्य अंतरिक्ष-जीव हैं क्या?
सवालों से बचने के लिए झारखंड में इं.डि.या. गठबंधन की सरकार विधानसभा का सत्र एक दिन पहले ही समाप्त कर देती है, इस पर तो माननीय सांसद इं.डि.या. गठबंधन के हिस्सा होने का फर्ज तो नहीं निभाते हैं, अलबत्ता संसद नहीं चलने देकर गर्व से अपना पीठ थपथपाते हुए डेमोक्रेसी के शान में बंदर राग में गजल गुनगुनाते हैं।
रांची में छात्रों के आंदोलन को कभर करने वाले वाले पत्रकार को थाना में डिटेन कराया जाता है और एफआईआर की कॉपी थमा दी जाती है, परिवारवादियों की तानाशाही उजागर हो जाती है, जो अक्सर होती रहती है; ऐसे में वह आदर्श, उसूल और लोकतंत्र के नैतिकता पता नहीं क्यों पीछे रह जाती है?
हकीकत है कि काठ की हांडी से बार-बार खिचड़ी नहीं पकाइ जा सकती है। आवाम की समझदारी ने अपने मतदान से देश भर में लोकप्रिय सरकार का गठन किया है और आने वाले दिनों में जनता की समझदारी दूध का दूध और पानी का पानी को अलग करने का अपनी समझदारी पुन: सिद्ध करेगी...।