त्रिवेणी दास
परिपक्व हो गया लोकतंत्र
जनता समझदार हो गई,
राजनीति की सूझ बूझ अब
उसकी अरदार हो गई
लोकतंत्र के ताने-बाने में
कीर्तिमान टूट जाते हैं
बनाने वाले कीर्तिमान
पीछे छूट जाते हैं ,
जिन्हें टूटा कहा जाता था
कीर्तिमान बन जाते हैं
स्टार प्रचारक काम न आए
जनता के मन में न भाए
जात पात सब मिट गया ,
बांकीपुर में देखो भाई
पांडेय प्रशांत किशोर जीत गया।