चतुराई और चालाकी में अंतर...
त्रिवेणी दास
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। चतुराई एवं चालाकी में जमीन-आसमान का अंतर होता है। मंशा, नियत, उद्देश्य बुद्धि एवं विवेक के स्तर पर दोनों के मध्य एक बड़ी दूरी होती है। चतुराई का संबंध सकारात्मक एवं व्यापक उद्देश्य के लिए बुद्धिमता एवं विवेक के उपयोग से लक्ष्य की प्राप्ति एवं समस्या का समाधान से है।
जबकि चालाकी का संबंध स्वार्थ की पूर्ति के लिए छल, कपट, धोखाधड़ी और भ्रमजाल फैलाने इत्यादि से है। चतुराई सृजन का परिणाम उत्पन्न करता है जबकि चालाकी विध्वंस का परिणाम उत्पन्न करता है। किसी के द्वारा रचे जा रहे चतुराई एवं चालाकी के बीच का अंतर समझना जरूरी है और समझने की प्रक्रिया भी अत्यंत सरल है।
ध्यान देने से स्पष्ट हो जाता है कि किसी भी संरचना के पीछे उद्देश्य क्या है? जैसे ही उद्देश्य से स्पष्ट होता है, चतुराई एवं चालाकी के मध्य की सूक्ष्म रेखा स्पष्ट दिखाई देने लगती है। सांसारिक जीवन में पग-पग में चालाकी से आमना-सामना होते रहता है। अक्सर हम धोखा भी खाते रहते हैं, जिसका खामियाजा व्यक्ति, परिवार एवं समाज को भी भुगतना पड़ता है।
व्यक्तिगत क्षति की पूर्ति तो फिर भी थोड़ा आसान है परंतु पारिवारिक एवं सामाजिक क्षति की पूर्ति में कई पीढ़ी गुजर जाते हैं। की जा रही चालाकी से बचने में ही भलाई है और चालाकी करने से जितना बचा जा सके उतना ही अच्छा है.. फिर भी सकारात्मक एवं व्यापक उद्देश्य के लिए कभी-कभी चालाकी का भी सदुपयोग किया जा सकता है।