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पश्चिम बंगाल का चुनाव और भाजपा

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पश्चिम बंगाल का चुनाव और भाजपा
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पश्चिम बंगाल का चुनाव और भाजपा

त्रिवेणी दास

एबीएन एडिटोरियल डेस्क । 2026 के बंगाल चुनाव में 4 मई को आया परिणाम को ऐतिहासिक कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा। 1952 में पहली बार बंगाल विधानसभा का चुनाव हुआ उस समय देश में स्वतंत्रता आंदोलन के कारण कांग्रेस की लोकप्रियता थी, इसीलिए कांग्रेस जीत गई। 

25 वर्षों तक कांग्रेस की सरकार रही। फिर 34 वर्षों तक वाम दल CPI(M) की सरकार रही उसके बाद 15 वर्षों तक ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस(TMC) की सरकार रही। इस बार के विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल के राजनीति की इतिहास एवं भूगोल को पूरी तरह से बदल के रख दिया है। 

बंगाली श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राजनीति की जिस विचारधारा के नींव की स्थापना की थी उसका परचम पूरे देश में लहरा रहा था, परंतु इस बार बंगाल की जनता ने अपनी क्रांतिकारी निर्णय से बंगाल को भी भगवा के रंग में रंग दिया है।

ममता बनर्जी का बाहरी भीतरी का नारा इस बार काम नहीं आया। मछली-मांस के मुद्दा के ऊपर झाल-मुड़ी का मुद्दा भारी पड़ गया। चुनाव परिणाम ने यह प्रमाणित कर दिया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कोई मुद्दा था ही नहीं जिसे मुद्दा बनाने की टीएमसी ने भरपूर कोशिश की थी। चुनाव में 93% मतदान जहां अप्रत्याशित था वहीं महिलाओं की लंबी कतार ने सिद्ध कर दिया कि महिला सम्मान एवं उनकी सुरक्षा महिलाओं की पहली प्राथमिकता थी।

मुस्लिम बहुल मालदा, उत्तरी दिनाजपुर और वीरभूम में भाजपा के प्रदर्शन से यह भी प्रमाणित हो रहा है कि अब मुस्लिम समाज को तुष्टीकरण के नाम पर और अधिक ठगा नहीं जा सकता है।

बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एम के स्टालिन ने अपने क्षेत्रीय पार्टी को अपनी निजी जागीर में बदल दिया था, और इस बार के चुनाव परिणाम ने यह भी सिद्ध कर दिया कि इस प्रकार के दादागिरी को जनता बर्दाश्त लंबे समय तक नहीं करती है। 

2024 के लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद अन्य राजनीतिक दलों को भारतीय जनता पार्टी निस्तेज दिखने लगी थी, परंतु नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह की जोड़ी ने उसे स्थिति को बड़ी कुशलता पूर्वक संभाला और भाजपा की प्रभामंडल को और भी तेजवान बनाया। असम में भाजपा की हैट्रिक इस बात का प्रमाण है कि भाजपा अपने कार्यों के द्वारा प्रो-इनकंबेंसी क्रिएट करने में सफलता अर्जित करती जा रही है। 

ममता बनर्जी के द्वारा इस्तीफा नहीं दिए जाने की घोषणा बाल-हठ के अतिरिक्त और कुछ नहीं है क्योंकि राज्यपाल को संवैधानिक अधिकार है कि वह अल्पमत वाली सरकार को बर्खास्त कर देंगे और चुनाव आयोग के द्वारा घोषित परिणाम के आधार पर बहुमत वाली दल को सरकार बनाने के लिए निमंत्रण दे देंगे।

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