सट्टेबाजों का काला जाल! करोड़ों का सट्टा, बर्बाद होती युवा पीढ़ी
अभय कुमार सिंह
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। हजारीबाग में आईपीएल का रोमांच अब खतरनाक मोड़ ले चुका है। क्रिकेट के नाम पर चल रहा सट्टेबाजी का हाई-टेक नेटवर्क युवाओं को रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाकर बबार्दी के दलदल में धकेल रहा है। कुम्हारटोली नालापर का युवा मयंक और प्रिंस मिलकर ऐसा काला साम्राज्य चला रहे हैं, जिसकी जड़ें अब बड़े शहरों तक फैल चुकी हैं।
शहर के कानी बाजार, दिपुगढ़ा, हरनगंज, बुच्चड़ टोली रोड और रामनगर जैसे इलाके सट्टेबाजी के हॉटस्पॉट बन चुके हैं। व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए रेट तय हो रहे हैं, जबकि पैसों का लेन-देन पूरी तरह आॅनलाइन हो रहा है। इस नेटवर्क में वही युवा सक्रिय हैं, जो सालभर साइबर अपराध जैसे बैंक अकाउंट हैकिंग, डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉरशन में लिप्त रहते हैं और आईपीएल के दौरान सट्टेबाजी में कूद पड़ते हैं।
सूत्र बताते हैं कि इस अवैध धंधे की कमान मयंक और प्रिंस के हाथों में है, जो रांची के बिट्टू और केडी नामक बड़े सट्टेबाज के लिए काम कर रहे हैं। इनके नीचे दीपक, प्रदीप और अहमद जाकारिया जैसे कई आपरेटर सक्रिय हैं। यह गिरोह नये लड़कों को जोड़कर नेटवर्क को लगातार विस्तार दे रहा है। पिछले वर्ष पुलिस ने इचाक में छापेमारी कर चतरा निवासी राहुल कुमार को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से मिले मोबाइल ने चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। वह आईपीएल के जरिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये का सट्टा संचालित कर रहा था।
इस मामले में उस वक़्त 12 अन्य युवाओं पर भी केस दर्ज हुआ था, जिनमें कई संपन्न परिवारों के लड़के शामिल थे। इतना होने के बावजूद ये खेल कभी रुकता नहीं है, सालो भर इसका संचालन होता है। आईपीएल के दौरान सट्टेबाजी चरम पर पहुंच जाती है। सट्टेबाजी की चमक-दमक ने कई युवाओं को महंगी गाड़ियां, जमीन और गहनों तक पहुंचाया, लेकिन जल्द ही यह सब कर्ज और बर्बादी में बदल गया।
जो कल लाखों में खेलते थे, आज सैकड़ों रुपये के लिए मोहताज हैं। लेकिन अपने पोजीशन पर सरगना ठाठ से राज कर रहा है। जरुरत है साइबर सेल को इसपर ध्यान देने की। क्योकि हजारीबाग की यह सट्टा नेटवर्क अब जयपुर और दिल्ली तक फैल चुका है। सवाल बड़ा है कि क्या प्रशासन इस काले साम्राज्य को जड़ से खत्म कर पाएगा, या आईपीएल के हर सीजन के साथ युवा पीढ़ी यूं ही इस जाल में फंसती रहेगी, बर्बाद होती रहेगी?