पवन कुमार पांडेय
एबीएन हेल्थ डेस्क। 39 साल के एक युवा कार्डियोलॉजिस्ट की अस्पताल में राउंड लेते समय ही अचानक हार्ट अटैक से मृत्यु हो गयी। न वे मोटे थे, न इलाज मिलने में देर हुई। सब कुछ सेकेंडों की दूरी पर था, फिर भी नहीं बच पाये। हाल ही में एक डॉक्टर की कैथलैब में ही मृत्यु हुई थी। डॉ साहब को मेरी तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि...।
पर ऐसे में गोल्डन आवर वाली अवधारणा पर भी भरोसा डगमगाने लगता है। आधुनिक विशेषज्ञों ने कारण बताये हैं, जिसमें क्या हुआ इसका जबाब मिल भी जाता है, पर क्यों इसका मुझे नहीं मिला। मैं आयुर्वेद की दृष्टि से अगर देखता हूं तो असली जड़ कहीं और दिखती है। आचार्य चरक और आचार्य सुश्रुत दोनों एक बात कहते हैं।
- वेगान् धारयतो रोगान् बहव: सम्प्रजायन्ते (चरक) जो लोग शरीर के प्राकृतिक वेगों को रोकते हैं, उनमें अनेक रोग उत्पन्न होते हैं।
- वेगान् धारयतो मृत्युर्भवति। (सुश्रुत) वेगों को रोकने वाला मनुष्य मृत्यु तक को प्राप्त हो सकता है। तेरह ऐसे वेग बताये गये हैं जिन्हें रोकना नहीं चाहिए।
पेशाब, मल, गैस, छींंक, डकार, उल्टी, जम्हाई, आंसू, भूख, प्यास, नींद, हांफ और वीर्य। इन्हें दबाने से शरीर का प्रवाह रुकता है और रोग बनते हैं। आज का जीवन देखिये। अस्पताल या दफ्तर में बैठे-बैठे लोग गैस रोकते हैं, पेशाब रोकते हैं, भूख और नींद को टालते हैं। यही धीरे-धीरे हृदय तक असर करता है। आप खुद सोचिये आप ने कब खोल के मन से हवा खोली है?
घर पर फिर भी संभव है, आफिस वाले क्या करें? जहां दिन भर कुर्सी पर बैठना है। आप खुद महसूस कीजिये जब आप हवा की वेग को रोकते हैं, तुरंत आपके शरीर में उसका असर दिखता है, अजीब सा अनकंफर्टेबल महसूस होता है। यहीं से शुरुआत होती है, उदावर्त नामक रोग की। आचार्य चरक ने साफ कहा है कि वायु का वेग रोकने से उदावर्त होता है। उदावर्त के लक्षण रोजमर्रा में महसूस होते हैं।
पेट में भारीपन, दर्द या ऐंठन। डकार उल्टी दिशा में आना। छाती में जकड़न और दबाव। गले में अटकाव, कभी सिर तक चढ़ जाना। बार-बार गैस रोकने के बाद ऊपर की ओर उसका फील होना। यह सब वही है जिसे आयुर्वेद ने उदावर्त कहा है। इसी स्थिति में अगर तनाव और रात्रि जागरण भी जुड़ जाये तो हृदय के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
इसलिए इन अचानक हृदयाघातों के पीछे केवल ब्लॉकेज या कोलेस्ट्रॉल नहीं, बल्कि यह भी एक गहरी सच्चाई है। नैसर्गिक वेगों को रोकना, उदावर्त की स्थिति बनना और उस पर जागरण और तनाव। यही तीन बातें हृदय के असली शत्रु हैं। गोल्डन आवर तभी काम करेगा जब शरीर को पहले से स्वाभाविक चलने दिया जाये।
नोट : मेरी बात को किसी पैथी की तारीफ और किसी की बुराई की नजर से ना देखें। मैंने केवल अपनी समझ की बात लिखी है।