एबीएन एडिटोरियल डेस्क। इंसान चाहे जिस भी उम्र का हो ज्ञान ही तो अर्जित करते रहता है। बचपन में ए फॉर एप्पल से शुरू होकर तीन पहिया साइकिल दोपहिया साइकिल फटफटिया कार काफी किताब स्कूली शिक्षा कॉलेज की शिक्षा मास्टर डिग्री आईएएस आईपीएस डॉक्टर इंजीनियर साइंटिस्ट बैंकर और न जाने क्या-क्या...?
कभी सोचा है व्यवहारिक जीवन में इतने सारे ज्ञान काम की वस्तु होती भी है क्या? संसार भर में फैला हुआ अर्थ तंत्र का ताना-बाना और उसमे लिपटा हुआ इंसान चैन की सांस ले पा रहा है क्या?
इंसान ने भौतिक जगत में अद्भुत क्रांति उत्पन्न तो कर दिए हैं, परंतु यदि क्रांति नहीं हुआ है तो वह है विचार जगत में क्रांति और यही कारण है कि छीना-झपटी लूट-खसोट का उत्पात हर ओर उधम मचा रहा है।
आज एक बड़ा और व्यापक विचार क्रांति की आवश्यकता है जिससे इंसान गहरी नींद ले सके, संतोष का सुख भोग सके और सहयोग करके तृप्ति की अनुभूति प्राप्त कर सके, जिसकी शुरुआत स्वयं के साथ किया जा सकता है...।