मुरलीधर
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। भारत धम की भूमि है और यही धर्म और भक्ति देश की श्रेष्ठ सांस्कृतिक परम्परा है। आधुनिक काल में जिस प्रकार गुरु भक्ति की परंपरा आज भी देश में जीवित है उससे हमारी पांच हजार साल पुरानी सभ्यता और संस्कृति की महानता प्रगट होती है। दुनिया के अनेक सभ्यता रोम, यूनान आदि नष्ट हो गयी लेकिन भारत भूमि संत मनीषियों के तप और मार्गदर्शन के कारण आज भी विश्व में श्रेष्ठ है। ऐसे ही एक श्रेष्ठ परम्परा के वाहक स्वामी अद्धैतानंदजी महाराज ने जो भक्ति का संदेश और परम्परा कायम किया वह आज भी श्रेष्ठ है।
ज्ञान की श्रेष्ठ परम्परा को स्वामी जी ने अपनी जिंदगी में उतारकर प्रकट किया। स्वामी सत्यानंदजी परमहंस ने बताया कि ब्रम्ह विद्यालय आश्रम की लीलारी कुटी जो रोहतास जिले में है, वहां से यह गुफा 60 किलोमीटरकी कदूरी पर है। यहां जाने के लिये कोई नियमित बस या कोई दूसरी सुविधा नहीं है।
इस संबंध में लेखक सह वरीय अधिवक्ता अवध बिहारी मितवा ने विशेष भेंट में बताया कि रामनवमी के शुभ अवसर पर रोहतास गढ़ी पहाड़ी जंगल में स्थित जोगिया मान गुफा पवित्र स्थली पर भक्तों ने परमहंस दयाल स्वामी अद्वैतानंद जी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई और पाठ आरती पूजन अर्चन किया। यों तो परमहंस दयाल जी की जयंती रामनवमी को देश विदेश में मनाई ही जाती है किंतु इस पवित्र गुफा पर यह प्रथम उत्सव है, जो सौभाग्यदाई और ऐतिहासिक है।
दुर्गम मार्ग और जटिल लोकेशन वाला यह कार्यक्रम राजपुर के स्वामी जी महाराज की आज्ञा व कृपा से ही संभव हुआ है। इस प्रोग्राम में अवधविहारी मितवा, सुनील कु. सिंह, मनोज वर्मा ,गप्पू स्वर्णकार, मोहन प्रसाद, शुभम सिंह निवासी बलिया, उ.प्र. तथा ओमप्रकाश, मनोज कुमार निवासी लिलारी रोहतास बिहार एवं पृथवी उराव आदि स्थानीय भक्तगण शामिल हुए।
वहां जाने के लिये एक रास्ता अकबरपुर से जाता है। यह स्थल स्वामी परमहंस दयाल जी महाराज के जीवन में महत्वपूर्ण स्थलों में एक है। इस स्थान पर अभी गुफा के पास रहने वाले लोग पूजा पाठ करते हैं। इसके विकास के लिए ब्रह्म विद्यालय आश्रम सजग और सक्रिय है। आज जिस प्रकार देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का विकास हो रहा है उसमें जोगिया मान गुफा का विकास भी देश के अध्यात्मिक उन्नति के लिये अनिवार्य है।
लेखक सह वकील अवध बिहारी मितवा ने बताया कि स्वामी सत्यानंदजी परमहंस की आज्ञा से रामनवमी के दिन मैं और मेरे कई मित्र इस गुफा में पहुंचे। रामनवमी के पुनीत अवसर पर जिस दिन स्वामी अद्वैतानंदजी महाराज का जन्म छपरा में हुआ था उसी दिन हम सब उनके तपोस्थली रोहतास के पहाड़ों के बीच स्थित तपोभूमि में पहुंचे। वहां हमने स्वामी जी के आदेश पर अदैतानंदजी महाराज की आरती की और उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया।
श्री मितवा ने बताया कि जब वे गुफा में पहुंचे तो रोमांच से भर उठे। उन्हें अलौकिक अनुभव हुआ। श्री मितवा ब्रम्ह विदयालय आश्रम में स्वामी अद्वैतानंद जी महाराज जिन्हें परमहंस दयाल के नाम से भी जाना जाता है उनके जीवन पर आधारित नाट्य के मंचन का अवसर भी मिलता है। वे परमहंस दयाल जी के जीवन पर अध्ययन भी करते हैं और उनकी तपोस्थली पर पहुंचने का अध्यात्मिक गौरव भी स्वामी जी के आर्शिवाद से प्राप्त हुआ। वे आने वाले समय में भी आश्रम के आदेश के अनुसार उस गुफा के विकास के लिए जो जबावदेही दी जायेगी वैसा काम करेंगे।
निश्चित ही महान संत अदैतानंदजी महाराज के जीवन और उनसे जुड़े स्थानों में छपरा के साथ रोहतास का जोगिया मान गुफा का विकास भी उस परमपूज्य अनुकरणीय संत की प्रेरणा पाने का माध्यम बने यह भारतीय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। गुरु से ज्ञान और ज्ञान से भक्ति की अकाट्य सिद्धांत और परम्परा के वाहक स्वामी परमहंस दयाल की भक्ति धारा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान स्वामी सत्यांनदजी परमहंस विगत तीन दशकों से पूरे देश में एक दिन के भी विश्राम के बिना भक्तों को ज्ञान और भक्ति का संदेश दे रहे हैं।
स्वामी जी अभी रांची के बसारगढ़ स्थित ब्रह्म विद्यालय आश्रम में सुबह दस से और शाम छह बजे से प्रतिदिन दो घंटै ज्ञान और भक्ति की गंगा अविरल प्रवाहित कर रहें हैं। 21 अपै्रल तक स्वामी जी रांची में प्रवास करेंगे। 22 को प्रात: गया के लिए प्रस्थान कर जायेंगे। आज भी सैकड़ों सन्यासी स्वामी के मार्गदर्शन में तत्वज्ञान की विशुद्ध शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।