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ओमिक्रोन : खतरा है बड़ा, रहें सतर्क और सावधान...

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ओमिक्रोन : खतरा है बड़ा, रहें सतर्क और सावधान...
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एबीएन एडिटोरियल डेस्क। भारत समेत 100 से अधिक देशों तक फैल चुके कोरोना के नए वैरिएंट ओमक्रोन के चलते ब्रिटेन में विश्व की पहली मौत हुई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इसकी पुष्टि की है। नए वेरिएंट की बढ़ती रफ्तार को थामने के लिए आज विश्व में जहां नाना तरह के उपाय खोजे जा रहे हैं, वहीं कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका असर बहुत ही कम होगा। आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता पद्मश्री प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल का कहना है कि देश में तीसरी लहर का आना तय है। इसका प्रभाव दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक दिखने लगेगा। जनवरी के अंतिम और फरवरी के पहले सप्ताह की शुरुआत में ओमिक्रोन चरम पर होगा। कैंसर होना भी अपने आप में एक तरह का म्यूटेशन है। फर्क सिर्फ इतना है कि कैंसर की वजह से हम बीमार होते हैं और वायरस म्यूटेशन अपने बचाव के लिए करता है। कोरोना वायरस में भी यही हुआ है। इंसान के शरीर में जब इम्युनिटी डेवलप होने लगती है, चाहे वह नेचरल से हो या वैक्सीन से बनने वालीङ्घ इससे पार पाना वायरस के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में खुद को बचाए रखने के लिए कोरोना अपना रंगरूप बदलने लगता है। अब तक कोरोना में कई हजार म्यूटेशन हो चुके हैं, लेकिन ज्यादातर ऐसे म्यूटेशन थे जो जल्द ही स्वत: खत्म हो गए। हां, डेल्टा, डेल्टा प्लस और ओमिक्रोन जैसे कुछ मजबूत वैरिएंट्स लंबे समय के लिए रह जाते हैं और हमारे लिए समस्या पैदा करते हैं। अब तक कोरोना के डेल्टा प्लस वेरियंट में सबसे ज्यादा 25 म्यूटेशन हुए थे, लेकिन ओमीक्रोन में 50 से भी ज्यादा म्यूटेशन हुए हैं। इनमें से 30 से ज्यादा म्यूटेशन तो सिर्फ इसके स्पाइक प्रोटीन के स्ट्रक्चर में ही हुए हैं। कहा जा रहा है कि इसी वजह से यह ज्यादा जल्दी इंफेक्शन फैलाता है। कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। यह लेख लिखे जाने तक भारत में ओमिक्रोंन के 500 मामले सामने आ चुके हैं तो सभी के कान खड़े हो गए हैं। इन मामलों के अलावा इनके संपर्क में आए कई लोग भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं, लेकिन वह ओमिक्रोन वैरिएंट से संक्रमित हैं या डेल्टा वेरिएंट या किसी अन्य से यह अभी साफ नहीं हो पाया है। सभी के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं। डॉक्टरों का मानना है कि ओमिक्रोन वैरिएंट कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से पांच गुना ज्यादा संक्रामक है। जिस तेजी से यह दक्षिण अफ्रीका से निकलकर दुनियाभर में फैला है, उससे यह तो स्पष्ट है कि यह बेहद संक्रामक है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह वैरिएंट कितना घातक है। ओमिक्रोन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह जानना भी जरूरी है कि इस वैरिएंट के संक्रिमितों में कैसे लक्षण दिखाई देते हैं। मेट्रो हॉस्पिटल फरीदाबाद में कार्यरत डॉ। भवेश ठाकुर ने बताया है कि चूंकि उनके पास इसके मरीज अभी आए नहीं हैं, लेकिन इसकी संक्रमकता अधिक ही है। इसलिए यह तेजी से फैल रहा है। लेकिन, इसकी मारक क्षमता कितनी है और इस पर हमारी दोनो डोज का कितना असर होगा इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल जो जानकारी है, उसके अनुसार सरकार इसके रोकथाम के लिए पूरी तरह सक्षम है। सरकार के निर्देश भी अस्पतालों में आ चुके हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बचाव का सबसे सुरक्षित उपाय यही है कि आप मास्क पहनें और शारीरिक दूरी का पालन करें। कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रोंन धीरे-धीरे अपने पैर पसारने लगा है। पूरी दुनिया में इसके मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। भारत में इसके मामले सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। कोरोना की पिछली लहर में डेल्टा वैरिएंट ने यहां भारी तबाही मचाई थी। डेल्टा से संक्रमित होने के बाद सांस लेने में दिक्कत, तेज बुखार, कमजोरी, खाने का स्वाद और सुगंध का पता नहीं चलने जैसे कुछ लक्षण दिखाई दे रहे थे। हालांकि, ओमिक्रोन के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं हैं। ओमिक्रोन वैरिएंट के लक्षण काफी अलग हैं। इसके लक्षण के बारे में कहा जा रहा है कि यह अब तक के सभी वैरिएंट में सबसे ज्यादा संक्रामक है। इसके अब तक जितने भी मरीज मिले हैं, उनमें कोविड-19 के आम लक्षण नहीं पाए गए हैं। किसी में भी फ्लू जैसी समस्या नहीं देखी गई है, जबकि डेल्टा में सबसे प्रमुख लक्षण यही था। जिस डॉक्टर ने पहली बार ओमिक्रोन के बारे में पूरी दुनिया को बताया था, उनके अनुसार इस वैरिएंट के मरीजों में कोविड के क्लासिक लक्षण नहीं थे। ओमीक्रोन के संदर्भ में दक्षिण अफ्रीकी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस महामारी से संक्रमित कई लोगों में हल्के लक्षण दिख रहे हैं या नहीं दिख रहे हैं। इन्ही लोगों से संक्रमण फैल रहा है। अभी तक जो बातें सामने आईं हैं, उससे साफ लग रहा हैं कि 70 से 80 फीसद लोगों में लक्षण नहीं दिख रहे हैं और लोगों को यह सामान्य सर्दी-खांसी लग रहा है। लक्षण गंभीर भी नहीं है, क्योंकि लोगों को सुगंध जाने या आॅक्सीजन की कमी जैसी समस्या भी नहीं हो रही है। भारत में रविवार को कोविड-19 के ओमिक्रोन के 17 और मामले सामने आए जिनमें नौ मामले राजस्थान की राजधानी जयपुर में, सात महाराष्ट्र के पुणे जिले में और एक मामला दिल्ली का है। इसके साथ ही देश में ओमिक्रोन के मामलों की कुल संख्या 23 हो गई है। जो लोग संक्रमित पाए गए हैं, उनमें से अधिकतर हाल में अफ्रीकी देशों से आए हैं या इस तरह के लोगों के संपर्क में थे। इसके साथ ही चार राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी में ज्यादा संक्रामक वैरिएंट के मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 की तीसरी लहर जनवरी-फरवरी में आ सकती है। उन्होंने कहा कि यदि हर कोई मास्क पहनता है, तो इसे रोका जा सकता है। केंद्र सरकार के अनुसार जिन देशों को खतरे वाले देशों की सूची में डाला गया है उनमें ब्रिटेन सहित यूरोपीय देश, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बोत्सवाना, चीन, मॉरिशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर, हांगकांग, इजराइल शामिल हैं। यदि हमारा देश खतरे वाले देशों से बाहर है तो निश्चित रूप से यह हमारी सजगता और सरकार की दूरदर्शिता है। अच्छी बात यह बताई जा रही है भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में सरकार ने पिछले दिनों हुए महामारी को ध्यान में रखते हुए देश की आधी आबादी को पूरी खुराक लगा दी गई है। लेकिन, महामारी तो विकट परिस्थितियों वाली होती ही है जिसे दुनिया ने पिछले दिनों देखा है। इसलिए इस बार वैज्ञानिकों की शोध के बाद इस बात को बहुत ही गंभीरता से लिया है कि यदि हम स्वयं अपना बचाव करते रहेंगे तो संभव है कि ओमिक्रोन नामक इस महामारी से अपने जीवन की रक्षा हम कर सकेंगे। समस्या जरूर बहुत बड़ी है, लेकिन जीवन रक्षा का भार केवल सरकार का ही नहीं, अपना भी है। हमें इसका ध्यान रखना ही होगा। आरोप—प्रत्यारोप का समय नहीं है। इसलिए सतर्क रहें, सावधानी बरतें।
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